बोलता सच/देवरिया: देवरिया में गोरखपुर रोड स्थित बहुचर्चित अब्दुल गनी शाह मजार एवं कब्रिस्तान भूमि विवाद में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। विस्तृत जांच के बाद एसडीएम कोर्ट ने राजस्व अभिलेखों में दर्ज फर्जी प्रविष्टि को निरस्त करते हुए भूमि को पुनः सरकारी खाते में बहाल करने का आदेश पारित किया है।
यह आदेश अपर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) देवरिया अवधेश कुमार निगम द्वारा दाखिल मुकदमे की सुनवाई के बाद जारी किया गया। साथ ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने और राजस्व रिकॉर्ड में कूट रचना करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
1992 के आधार पर हुई थी कूट रचना, दस्तावेज मिले फर्जी
प्रशासनिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि विवादित 0.124 हेक्टेयर भूमि मूल रूप से बंजर भूमि थी।
लेकिन 19 जून 1992 के आधार पर मनगढ़ंत और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर इसे वक्फ मजार और कब्रिस्तान के नाम दर्ज करा दिया गया था।
जांच में प्रस्तुत सभी दस्तावेज—
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फर्जी,
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मनगढ़ंत,
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और अवैध पाए गए।
अधिकारियों के अनुसार इस कूट रचना का उद्देश्य सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा स्थापित करना था।
एसडीएम कोर्ट का सख्त आदेश
एसडीएम अवधेश कुमार निगम द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि—
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फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज करना राजस्व नियमों के पूरी तरह विपरीत है।
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इसलिए संबंधित प्रविष्टि को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।
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राजस्व अभिलेखों में संशोधन कर भूमि को उसकी मूल श्रेणी, यानी बंजर खाते में पुनः दर्ज किया जाए।
साथ ही आदेश में तहसीलदार देवरिया को यह निर्देश दिया गया है कि—
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फर्जी नाम दर्ज कराने में शामिल व्यक्तियों,
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तथा संबंधित सरकारी कर्मियों
की जांच कर विधिक व दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाए।
आदेश की प्रति तहसीलदार देवरिया को भेज दी गई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई पर सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे
“देवरिया की एक बड़ी जीत”
बताया और प्रशासन के निर्णय का स्वागत किया।
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