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तेजी से बचाव अभियान शुरू: इंडोनेशिया में बढ़ी खसरा से मौतों के बाद व्यापक टीकाकरण

Bolta Sach News
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जकार्ता: इंडोनेशिया के पूर्व जावा प्रांत में हालिया खसरा महामारी ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हाल ही में 17 बच्चों की मृत्यु जिनमें से 16 सुमेनेप जिले में हुई के बाद, सरकार ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया है।

महामारी का मंजर

  • पिछले आठ महीनों में इस प्रांत में खसरे के 2,000 से अधिक मामले रिपोर्ट हुए हैं।

  • मृतकों में से अधिकांश गैर-टीकाकृत या अधूरे टीकाकरण वाले बच्चे थे।

तत्काल प्रतिक्रिया: टीकाकरण कैम्पेन

  • 78,000 बच्चों (9 महीने से 6 साल तक) को निशुल्क टीके देने का अभियान शुरू किया गया है ताकि संक्रमण को रोका जा सके।

टीकाकरण कवरेज में कमी

  • इंडोनेशिया में 5 वर्ष से कम उम्र के सिर्फ 72% बच्चों को पिछले वर्ष खसरे का टीका मिला है; कई प्रांतों में यह संख्या 50% से कम है।

  • इसी कमी के चलते 2018 में पापुआ प्रांत में भी एक बड़ा प्रकोप फैला था। उस समय धार्मिक मतभेद ख़ासकर हिंदू मांस संबंधी संदेहों ने टीकाकरण स्वीकार्यता को प्रभावित किया।

सामाजिक समर्थन की आवश्यकता

  • सुमेनेप ज़िले के उपप्रमुख इमाम हस्सीम ने समुदाय और धार्मिक नेताओं से सहयोग की अपील की:
    “नहीं तो यह बीमारी हमारे बच्चों में और फैल जाएगी और भविष्य में यह और घातक हो सकती है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में 84% बच्चों को खसरे की पहली खुराक, और 76% को दूसरी खुराक मिली है फिर भी यह 95% कवरेज के लक्ष्य से कम है, जो पूरे समुदाय में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाये रखने के लिए जरूरी है।


निष्कर्षात्मक टिप्पणी:
इंडोनेशिया में हालिया घटनाएँ स्पष्ट कर रही हैं कि अपूर्ण टीकाकरण कवरेज संक्रमणों को कैसे उभारता है। टीकाकरण अभियान एक जरूरी कदम है, लेकिन इसे सफल बनाने में स्थानीय समुदायों और धार्मिक नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी अहम भूमिका निभाएगी।


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