जानकारी के मुताबिक, मकान मालिक ओमप्रकाश मिश्रा अभियोजन विभाग से रिटायर्ड एडिशनल डायरेक्टर हैं। उनका परिवार शनिवार सुबह घर में ताला लगाकर उत्तराखंड गया था। बुधवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे जब परिवार वापस लौटा तो मुख्य गेट बाहर से बंद मिला। अंदर जाने पर साइड एंट्री का ताला टूटा हुआ था और दो कमरों के दरवाजे खुले मिले। अलमारियों के लॉकर टूटे पड़े थे और उनमें रखे जेवर, नकदी तथा कीमती सामान गायब था।
पुलिस जांच में सामने आया कि तीन मंजिला मकान में कई कमरे होने के बावजूद चोरों ने सिर्फ उन्हीं दो कमरों को निशाना बनाया, जहां नकदी और गहने रखे गए थे। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि आरोपियों को घर की पूरी जानकारी पहले से थी।
जांच के दौरान कमरे से बीड़ी का एक बंडल भी बरामद हुआ है। मकान के बगल में निर्माण कार्य चल रहा है और पुलिस को शक है कि घटना से पहले रेकी की गई थी। आशंका जताई जा रही है कि किसी मजदूर या स्थानीय व्यक्ति ने इस वारदात में मदद की हो सकती है।
चोर सिर्फ नकदी और जेवर ही नहीं ले गए, बल्कि ओमप्रकाश मिश्रा के वर्षों पुराने दुर्लभ नोट और सिक्कों के कलेक्शन पर भी हाथ साफ कर गए। परिवार के अनुसार, इस कलेक्शन की कीमत करीब पांच लाख रुपये थी। इसमें एक रुपये से लेकर सौ रुपये तक के पुराने नोट और दुर्लभ सिक्के शामिल थे, जो परिवार के लिए भावनात्मक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण थे।
पुलिस को यह भी आशंका है कि आरोपी वारदात के बाद पास से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक के रास्ते फरार हुए होंगे, क्योंकि वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। फिलहाल पुलिस आसपास के कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
घटना की सूचना मिलते ही Special Task Force, क्राइम ब्रांच और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। टीम ने टूटे लॉकर, अलमारियों और अन्य स्थानों से फिंगरप्रिंट व अन्य साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस हाल ही में जेल से छूटे अपराधियों और पुराने चोरी के मामलों में शामिल बदमाशों का रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।
विभूतिखंड इंस्पेक्टर अमर सिंह ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।