बोलता सच,नई दिल्ली : असम की राजनीति में बयानबाजी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ दो अलग-अलग पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि खरगे ने एक चुनावी रैली के दौरान आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणी की, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
आरएसएस के मुताबिक, यह बयान असम के श्रीभूमि जिले के करीमगंज दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के नीलामबाजार में आयोजित एक रैली के दौरान दिया गया। आरोप है कि अपने संबोधन में खरगे ने भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की विचारधारा की तुलना “जहरीले सांप” से की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि नमाज के दौरान सामने जहरीला सांप आ जाए, तो पहले उसे मारना चाहिए और फिर नमाज पढ़नी चाहिए—और इसी संदर्भ में उन्होंने बीजेपी और आरएसएस को उस सांप से जोड़ा।
आरएसएस ने इस बयान को अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इस तरह की भाषा न केवल उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाती है, बल्कि समाज में डर, वैमनस्य और हिंसा का माहौल भी पैदा कर सकती है।
अपनी शिकायत में आरएसएस ने आरोप लगाया है कि यह बयान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत “भ्रष्ट चुनावी आचरण” की श्रेणी में आता है। साथ ही, इसे विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बढ़ाने और सार्वजनिक शांति भंग करने वाला भी बताया गया है।
इस मामले में आरएसएस के उत्तर असम के सचिव खगेन सैकिया ने दिसपुर थाने में, जबकि दक्षिण असम के सचिव ज्योत्स्नामोय चक्रवर्ती ने सिलचर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग तक अपनी शिकायत पहुंचाई है।
इस घटनाक्रम के बाद असम की सियासत में तनाव और बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के बयान विवाद को और गहरा सकते हैं और राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं।
फिलहाल, इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह विवाद चुनावी राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
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