रामघाट रोड स्थित एक कार्यक्रम में बोलते हुए साध्वी प्राची ने आरोप लगाया कि एएमयू के हॉस्टल अब पढ़ाई के केंद्र नहीं रहे, बल्कि वहां अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हॉस्टल के कमरों से नकली नोट, फर्जी दस्तावेज और हथियार से जुड़े सामान बरामद होना बेहद गंभीर मामला है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर सरकारी जमीन कब्जाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि हाल ही में हॉर्स राइडिंग से जुड़ी जमीन को एएमयू प्रशासन ने अपनी संपत्ति बताया, जबकि वह सरकारी जमीन है। इसको लेकर उन्होंने प्रशासन पर “भू-माफिया” जैसी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया और सख्त कार्रवाई की मांग की।
साध्वी प्राची ने अपने बयान में एएमयू के इतिहास पर भी सवाल उठाए और कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ मुद्दों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों के सबूत मिलते हैं, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने मामले में आरोपी बताए जा रहे शहजाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की भी बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल निलंबन या निष्कासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि दोषियों को कानून के तहत कठोर सजा मिलनी चाहिए।
इस पूरे बयान के बाद राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्थिति स्पष्ट होती है। ऐसे में अब सभी की नजर संभावित जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।