केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब कंपनियां भारत में एंड-टू-एंड उत्पाद डिजाइन कर रही हैं। पहले भारत में सहायक कार्य अधिक होता था, लेकिन अब ग्राहक की जरूरत तय करने से लेकर चिप के अंतिम परीक्षण तक पूरी प्रक्रिया देश में ही पूरी हो रही है। यह बदलाव न केवल उद्योग के लिए, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता के लिहाज से भी ऐतिहासिक है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए क्वालकॉम की पूरी टीम को बधाई दी।
सेमीकॉन मिशन 2.0 जल्द होगा शुरू
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 जल्द शुरू किया जाएगा, जिसकी घोषणा हालिया बजट में की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि मिशन 2.0 में सबसे पहले डिजाइन को प्राथमिकता दी जाएगी, उसके बाद उपकरण और सामग्री पर फोकस किया जाएगा। साथ ही, प्रतिभाओं को अगले स्तर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि छात्र पूरे सिस्टम को डिजाइन करने की गहरी क्षमता विकसित कर सकें।
मंत्री ने बताया कि अधिक फैक्ट्रियों और पैकेजिंग इकाइयों को देश में लाना भी मिशन का अहम हिस्सा होगा। वर्तमान में भारत 28 नैनोमीटर तकनीक पर काम कर रहा है, जबकि सेमीकॉन मिशन 2.0 के तहत 7 नैनोमीटर तक पहुंचने का लक्ष्य है। इसे अगले कुछ महीनों में अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एक लंबी, कई दशकों की यात्रा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर इस उद्योग के लिए 20 साल का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
सिलिकॉन वेफर की ताकत समझाई
सिलिकॉन वेफर दिखाते हुए मंत्री ने बताया कि इसकी हर चकती में 20 से 30 अरब ट्रांजिस्टर होते हैं। हर छोटा हिस्सा एक अलग इकाई होता है और इसी घनत्व के आधार पर चिप का डिजाइन किया जाता है। यह एक सिंगल चिप होती है, जिसमें जीपीयू और सीपीयू दोनों शामिल रहते हैं। इससे बनने वाला मॉड्यूल एआई-सक्षम डेस्कटॉप कंप्यूटर, कैमरा, राउटर, मशीनों के साथ-साथ कार, ट्रेन और हवाई जहाजों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
सेमीकॉन मिशन 1.0 की उपलब्धियां
वैष्णव ने बताया कि सेमीकॉन मिशन 1.0 के तहत प्रतिभा विकास पर विशेष जोर दिया गया। 10 साल में 85 हजार लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य था, जिसमें से चार साल में ही 67 हजार इंजीनियर तैयार हो चुके हैं। यह प्रशिक्षण अब 315 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दिया जा रहा है। छात्र खुद चिप डिजाइन कर रहे हैं और अंतिम उत्पाद की जांच भी कर रहे हैं। दावोस में उद्योग जगत के नेताओं ने इस मॉडल की सराहना की है और माना है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर प्रतिभा की कमी को भारत पूरा कर सकता है।