बोलता सच,नई दिल्ली : भारत और जर्मनी मिलकर अब तक के सबसे बड़े रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच अत्याधुनिक पनडुब्बियों के निर्माण को लेकर बातचीत चल रही है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 8 अरब डॉलर बताई जा रही है। अगर यह करार पूरा होता है, तो यह भारत के रक्षा इतिहास का सबसे बड़ा सौदा माना जाएगा।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील की खास बात यह होगी कि पहली बार भारत को पनडुब्बी निर्माण की अत्याधुनिक जर्मन तकनीक भी ट्रांसफर की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि अगले सप्ताह जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा से पहले इस समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश की जा रही है।
भारत में बनेंगी जर्मन मॉडल की पनडुब्बियां
रिपोर्ट के अनुसार, यह पनडुब्बियां जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स जीएमबीएच और भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के सहयोग से भारत में बनाई जाएंगी। फिलहाल भारतीय नौसेना के पास रूस निर्मित पनडुब्बियां हैं और हाल के वर्षों में फ्रांस से भी छह नई पनडुब्बियां खरीदी गई हैं। माना जा रहा है कि जर्मनी के साथ डील पक्की होने की स्थिति में फ्रांस से प्रस्तावित तीन अतिरिक्त पनडुब्बियों की योजना रद्द हो सकती है।
AIP तकनीक से बढ़ेगी नौसेना की ताकत
नई पनडुब्बियों में एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम होगा, जिससे ये पनडुब्बियां डीजल-इलेक्ट्रिक सिस्टम की तुलना में कहीं अधिक समय तक पानी के भीतर रह सकेंगी। यह तकनीक भारतीय नौसेना की रणनीतिक क्षमता को काफी मजबूत करेगी।
पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे जर्मन चांसलर
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज 12 जनवरी 2026 को पहली बार भारत दौरे पर आ रहे हैं। वे गुजरात के अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और इसके बाद बेंगलुरु जाएंगे। इस दौरान रक्षा के साथ-साथ फार्मा सेक्टर में सहयोग और भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी चर्चा होने की संभावना है।
हालांकि, इस संभावित रक्षा सौदे पर अभी तक थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स, भारतीय रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन विशेषज्ञ इसे भारत की रक्षा रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
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