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केन्या पहुंचा भारतीय युद्धपोत ‘त्रिकंद’, रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती

Bolta Sach News
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Indian warship reaches Kenya
बोलता सच,नई दिल्ली : भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन गाइडेड मिसाइल युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर पहुंच गया है। इस दौरे के दौरान भारत ने केन्या को 100 इंसास राइफल और लगभग 50,000 गोलियां सौंपी हैं। साथ ही, केन्याई रक्षा बलों को 1.5 टेस्ला क्षमता की एमआरआई मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और केन्या के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को और गहराई देना है। भारतीय नौसेना के अनुसार, ‘त्रिकंद’ दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी ऑपरेशनल तैनाती के तहत मोम्बासा पहुंचा है।
यह दौरा उस समय हो रहा है जब पश्चिमी नौसैनिक कमान के कमांडर-इन-चीफ और उप-नौसेनाध्यक्ष कृष्णा स्वामीनाथन भी केन्या के दौरे पर हैं। इससे इस यात्रा का सामरिक महत्व और बढ़ गया है।
मोम्बासा प्रवास के दौरान भारतीय दल द्वारा कई पेशेवर, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, युद्धपोत के कमांडिंग अधिकारी केन्या के वरिष्ठ सरकारी और सैन्य अधिकारियों से मुलाकात करेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
इस दौरान उच्चस्तरीय रक्षा वार्ता भी हुई, जिसमें केन्या में भारत के उच्चायुक्त डॉ. आदर्श स्वाइका और उप-नौसेनाध्यक्ष कृष्णा स्वामीनाथन ने केन्या के रक्षा सचिव डॉ. पैट्रिक मरिरु से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग, नियमित उच्चस्तरीय दौरों और संस्थागत संवाद की सराहना की।
एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, केन्या रक्षा बलों को एमआरआई मशीन उपलब्ध कराने के लिए कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह कदम भारत की अपने साझेदार देशों की क्षमता निर्माण और मानवीय सुरक्षा में सहयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मोम्बासा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उप-नौसेनाध्यक्ष ने केन्या नौसेना के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओटिएनो को 100 इंसास राइफल और 50,000 गोलियां औपचारिक रूप से सौंपीं। यह पहल दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और रक्षा साझेदारी का प्रतीक मानी जा रही है।
दौरे के अंत में ‘त्रिकंद’ केन्या नौसेना के जहाजों के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास में भी हिस्सा लेगा। इस अभ्यास के जरिए दोनों देशों की नौसेनाएं अपनी रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करेंगी और संचालन से जुड़े अनुभवों का आदान-प्रदान करेंगी।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा भारत के ‘महासागर’ विजन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है। साथ ही, यह पहल क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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