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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले बढ़ी सियासी गर्मी, शुभेंदु अधिकारी ने ‘पक्षपाती’ पुलिस अधिकारियों को हटाने की मांग उठाई

Bolta Sach News
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West Bengal elections before 2026

बोलता सच : पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से लेकर प्रशासनिक निष्पक्षता तक कई मुद्दों पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा के बीच तनातनी बढ़ गई है। इसी बीच प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर बड़ा आरोप लगाया है।


अधिकारी का आरोप: ‘पक्षपाती’ पुलिसकर्मियों को चुनाव ड्यूटी से हटाया जाए

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आगामी विधानसभा चुनावों में कथित रूप से पक्षपात दिखाने वाले पुलिस अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी से हटाने की मांग की है।
उनका आरोप है कि हाल ही में दीघा में पुलिस एसोसिएशन के सम्मेलन में कई पुलिसकर्मियों ने सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी को चौथी बार मुख्यमंत्री बनाने की इच्छा व्यक्त की, जो उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।

अधिकारी ने कहा—
“वर्दी पहनने वाले लोग इस तरह के राजनीतिक बयान नहीं दे सकते। ये अधिकारी आदर्श आचार संहिता लागू होने पर चुनाव ड्यूटी में नहीं रहने चाहिए।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य की पुलिस “लोकतंत्र के अंतिम अवशेष तक को खत्म कर रही है”।


डेटा एंट्री ऑपरेटरों की नियुक्ति पर भी विवाद

अधिकारी ने दावा किया कि चुनाव संबंधी कार्यों के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटरों की भर्ती को लेकर भी “राजनीतिक हस्तक्षेप” हो रहा है।
उनके अनुसार, यह कार्य वेबेल टेक्नोलॉजी लिमिटेड को सौंपा गया है, और आरोप है कि ये नियुक्तियां TMC की सलाहकार फर्म I-PAC से जुड़े लोगों के जरिए की जाएंगी।

भाजपा नेता का कहना है—
“डेटा एंट्री ऑपरेटर आदर्श रूप से राज्य सरकार के स्थायी कर्मचारी होने चाहिए।”

इसी मुद्दे पर हाल ही में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सभी जिला चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे SIR या चुनाव संबंधी कार्यों में संविदा पर रखे गए डेटा एंट्री कर्मियों और बांग्ला सहायता केंद्र के कर्मचारियों को नियुक्त न करें।


ममता सरकार की आपत्ति

सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी CEC को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने एक वर्ष के लिए 1,000 डेटा एंट्री ऑपरेटर और 50 सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की नियुक्ति के लिए RFP जारी करने पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि राज्य की क्षेत्रीय इकाइयाँ हमेशा आवश्यकता के अनुसार स्वयं संविदात्मक कर्मियों की नियुक्ति करती रही हैं।


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