बोलता सच,रामपुर : रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को अवैध बताते हुए 15 दिन के भीतर ध्वस्त करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद यह विश्वविद्यालय एक बार फिर चर्चा में है। यदि निर्धारित समय सीमा में भवन नहीं हटाए गए तो आरडीए स्वयं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। इस घटनाक्रम के बीच यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि आखिर मौलाना मोहम्मद अली जौहर कौन थे, जिनके नाम पर इस विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।
रामपुर में हुआ था जन्म
मौलाना मोहम्मद अली जौहर का जन्म 10 दिसंबर 1878 को उत्तर प्रदेश के रामपुर में हुआ था। वह देश के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों, शिक्षाविदों, पत्रकारों, कवियों और प्रखर वक्ताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने खिलाफत आंदोलन में अहम भूमिका निभाई और वर्ष 1923 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने। इससे पहले वह मुस्लिम लीग के अध्यक्ष भी रह चुके थे।
रामपुर से ऑक्सफोर्ड तक का सफर
मोहम्मद अली जौहर ने प्रारंभिक शिक्षा रामपुर में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बरेली से हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी की और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से स्नातक किया। स्नातक में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के लिंकन कॉलेज गए, जहां से उन्होंने आधुनिक इतिहास (मॉडर्न हिस्ट्री) में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
पूरा परिवार था स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा
मोहम्मद अली जौहर का परिवार भी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय था। उनकी मां आबादी बानो बेगम, जिन्हें ‘बी अम्मा’ के नाम से जाना जाता था, और उनके बड़े भाई मौलाना शौकत अली भी स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। मोहम्मद अली जौहर और शौकत अली को देशभर में ‘अली बंधु’ के नाम से जाना जाता था।
खिलाफत आंदोलन में निभाई अहम भूमिका
प्रथम विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1919 में तुर्की के खलीफा के समर्थन और ब्रिटिश शासन के विरोध में शुरू हुए खिलाफत आंदोलन का नेतृत्व अली बंधुओं ने किया। इस आंदोलन को महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से भी जोड़ा गया, जिससे देश में हिंदू-मुस्लिम एकता को नई मजबूती मिली।
इसी दौर में ‘बी अम्मा’ द्वारा महात्मा गांधी के लिए तैयार की गई टोपी बाद में ‘गांधी टोपी’ के नाम से प्रसिद्ध हुई और स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बन गई।
पत्रकारिता के माध्यम से भी किया संघर्ष
मोहम्मद अली जौहर ने पत्रकारिता को भी आजादी की लड़ाई का माध्यम बनाया। उन्होंने अंग्रेजी में ‘कॉमरेड’ और उर्दू में ‘हमदर्द’ नामक समाचार पत्र शुरू किए। इन पत्रों के जरिए उन्होंने ब्रिटिश शासन की नीतियों की आलोचना की और लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाने का कार्य किया।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना में निभाई भूमिका
मौलाना मोहम्मद अली जौहर वर्ष 1920 में स्थापित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सह-संस्थापकों में भी शामिल थे। प्रारंभ में यह संस्थान अलीगढ़ में स्थापित हुआ, जिसे बाद में दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।
लंदन में निधन, यरुशलम में दफन
वर्ष 1930 में गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए लंदन गए मोहम्मद अली जौहर का 4 जनवरी 1931 को वहीं निधन हो गया। उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार उन्हें फिलिस्तीन के यरुशलम स्थित मस्जिद अल-अक्सा परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
2006 में बनी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने वर्ष 2006 में रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना की। विश्वविद्यालय का नाम मौलाना मोहम्मद अली जौहर के शिक्षा, पत्रकारिता और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से रखा गया।
हालांकि, विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से यह विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक विवादों में घिरा रहा है। ताजा मामले में रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए 15 दिनों के भीतर ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है। इस आदेश के विरोध में विश्वविद्यालय के छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी ने भी इस कार्रवाई का विरोध करते हुए आंदोलन तेज कर दिया है।
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