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उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बना आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण का नया केंद्र, पांच शहरों में विकसित हो रहे विशेष रक्षा क्लस्टर

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Uttar Pradesh Defence Industrial Corridor
बोलता सच,लखनऊ। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) क्लस्टर आधारित रणनीति के माध्यम से देश के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा विनिर्माण केंद्रों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश के कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट में प्रत्येक क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता के अनुरूप विशेषीकृत रक्षा क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इन क्लस्टरों के जरिए रक्षा उपकरणों के डिजाइन, परीक्षण, विनिर्माण, इंटीग्रेशन और निर्यात तक की संपूर्ण वैल्यू चेन तैयार की जा रही है। संचालित विनिर्माण इकाइयों, नए निवेशों और आधुनिक परीक्षण अवसंरचना के विकास से उत्तर प्रदेश देश की रक्षा औद्योगिक क्रांति का अग्रणी केंद्र बनकर उभर रहा है।

कानपुर बनेगा लघु शस्त्र और रक्षा वस्त्रों का हब

कानपुर को लघु शस्त्र, गोला-बारूद, बैलिस्टिक सुरक्षा प्रणालियों और रक्षा वस्त्रों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज ने एकीकृत गोला-बारूद निर्माण इकाई का संचालन शुरू कर दिया है। वहीं आधुनिक मैटेरियल एंड साइंसेज तथा ए.आर. पॉलिमर्स रक्षा वस्त्र और बैलिस्टिक सुरक्षा सामग्री का उत्पादन कर रहे हैं। डेल्टा कॉम्बैट सिस्टम्स भी लघु शस्त्र एवं गोला-बारूद निर्माण इकाई स्थापित कर रही है।

रक्षा अनुसंधान और परीक्षण को मजबूत बनाने के लिए आईआईटी कानपुर में रक्षा परीक्षण अवसंरचना योजना (DTIS) के तहत अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स टेस्टिंग फाउंडेशन (UASTF) और कम्युनिकेशन डिफेंस टेस्टिंग फाउंडेशन (CDTF) की स्थापना प्रस्तावित है। इससे यूएवी, संचार प्रणालियों और अन्य रक्षा तकनीकों के परीक्षण एवं प्रमाणीकरण को नई गति मिलेगी।

लखनऊ बन रहा मिसाइल और एयरोस्पेस तकनीक का केंद्र

लखनऊ को मिसाइल, एयरोस्पेस और एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है। यहां ब्रह्मोस एयरोस्पेस की अत्याधुनिक इकाई अगली पीढ़ी की मिसाइल प्रणालियों का निर्माण कर रही है। एरोलॉय टेक्नोलॉजीज एयरोस्पेस ग्रेड टाइटेनियम कास्टिंग तथा संकल्प सेफ्टी सॉल्यूशंस तकनीकी सुरक्षा उत्पादों का उत्पादन कर रही हैं।

इसके अलावा जयके एंटरप्राइजेज मिसाइल लॉन्च ट्यूब, मिसाइल कंटेनर और एडवांस्ड कम्पोजिट संरचनाओं के निर्माण की इकाई स्थापित कर रही है। SIAL Manufacturers, Capital Airgun Manufacturer, Tankup Engineers, KAWA UAV तथा IRDE-DRDO के प्रस्तावित इन्फ्रारेड डिटेक्टर टेक्नोलॉजी सेंटर सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी क्रियान्वयनाधीन हैं।

लखनऊ में प्रस्तावित एडवांस्ड मैटेरियल्स डिफेंस टेस्टिंग फाउंडेशन (AMDTF) उन्नत रक्षा सामग्रियों के परीक्षण के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा, जिससे रक्षा उद्योग को और मजबूती मिलेगी।

अलीगढ़ में ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीकों को मिलेगा बढ़ावा

अलीगढ़ को ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीकों, सेंसर और प्रिसिजन इंजीनियरिंग के प्रमुख क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां Werywin Defence, Nitya Creations और Shridha Udyog जैसी इकाइयां संचालित हैं, जबकि Ancor Research Labs, Allen & Alvan, New Space Research & Technologies, Amitec Electronics, Sidak Technologies और Icons Hindustan Aerospace & Defence Systems यूएवी, एंटी-ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और हेवी-लिफ्ट ड्रोन प्लेटफॉर्म विकसित कर रही हैं।

झांसी बनेगा भारी रक्षा विनिर्माण और गोला-बारूद उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र

झांसी रक्षा कॉरिडोर का सबसे बड़ा विस्फोटक, गोला-बारूद और भारी रक्षा विनिर्माण क्लस्टर बनकर उभर रहा है। यहां भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) की मिसाइल प्रोपल्शन सिस्टम्स निर्माण इकाई स्थापित है। साथ ही Goodluck Astra India, Navbharat Defence Systems, Micron Instruments और NextStrat TechVision जैसी कंपनियां विस्फोटक, आर्टिलरी शेल, मोर्टार गोला-बारूद और एम्युनिशन इंटीग्रेशन से जुड़ी परियोजनाओं पर कार्य कर रही हैं।

इसके अलावा WB Electronics, Lorenco Defence, Global Technocrats, Vijayan Trishul Defence Solutions और Gurutvaa Systems भी यूएवी, लॉयटरिंग म्यूनिशंस, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में निवेश कर रही हैं।

चित्रकूट में विकसित होगा रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स का आधुनिक केंद्र

चित्रकूट को रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम इंटीग्रेशन क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) लगभग 562.50 करोड़ रुपये के निवेश से अत्याधुनिक इंटीग्रेशन एवं टेस्टिंग सुविधा स्थापित कर रहा है। इस परियोजना से रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, संचार उपकरण, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के विकास को गति मिलेगी और इसके साथ सहायक उद्योगों का मजबूत औद्योगिक नेटवर्क तैयार होगा।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई ताकत

क्लस्टर आधारित इस रणनीति के तहत कानपुर को लघु शस्त्र एवं गोला-बारूद, लखनऊ को मिसाइल एवं एयरोस्पेस, अलीगढ़ को ड्रोन एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों, झांसी को विस्फोटक एवं भारी रक्षा विनिर्माण तथा चित्रकूट को रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सिस्टम इंटीग्रेशन का उत्कृष्टता केंद्र बनाया जा रहा है।

कानपुर और लखनऊ में प्रस्तावित रक्षा परीक्षण अवसंरचना (DTIS) सुविधाओं के सहयोग से यह कॉरिडोर डिजाइन, परीक्षण, विनिर्माण, इंटीग्रेशन और प्रमाणीकरण तक की एकीकृत औद्योगिक श्रृंखला स्थापित करेगा। इससे न केवल स्वदेशी रक्षा उत्पादन को गति मिलेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और उत्तर प्रदेश भारत के अग्रणी रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित होगा।


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