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कोटा से चला नीट सॉल्वर गैंग का खेल, बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध लगाकर करोड़ों की ठगी का आरोप

Bolta Sach News
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NEET solver gang operating from Kota
बोलता सच,कोटा/मुजफ्फरपुर : देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) को लेकर एक बार फिर बड़ा खुलासा सामने आया है। री-नीट परीक्षा के दौरान बिहार के मुजफ्फरपुर से जुड़े एक संगठित सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है, जिसकी जड़ें राजस्थान के कोटा तक फैली हुई बताई जा रही हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह पेपर लीक नहीं करता था, बल्कि परीक्षा केंद्रों के भीतर बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली में कथित सेंध लगाकर दूसरे छात्रों को अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दिलाने का काम करता था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला अर्पित सिंह है। अर्पित और उसके कुछ साथी वर्षों पहले डॉक्टर बनने का सपना लेकर कोटा पहुंचे थे और प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, लगातार प्रयासों के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने एक अवैध नेटवर्क खड़ा कर लिया, जो बाद में बड़े सॉल्वर गैंग में बदल गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, कोटा में पढ़ाई के दौरान अर्पित और उसके साथियों का संपर्क देशभर से आए कई मेधावी छात्रों से हुआ। इन्हीं छात्रों में से कुछ को पैसों का लालच देकर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने के लिए तैयार किया गया। धीरे-धीरे यह नेटवर्क मजबूत होता गया और अलग-अलग राज्यों में सक्रिय हो गया।
पुलिस पूछताछ में जो जानकारी सामने आई है, उसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। आरोप है कि गिरोह परीक्षा से पहले सॉल्वर छात्रों को बड़े होटलों में ठहराता था। वहीं उनकी मुलाकात बायोमेट्रिक जांच से जुड़े कुछ संदिग्ध कर्मियों और अन्य सहयोगियों से कराई जाती थी। सॉल्वर को भरोसा दिलाया जाता था कि परीक्षा केंद्र पर अंगूठे के निशान और चेहरे की पहचान संबंधी प्रक्रिया में कोई समस्या नहीं होगी और पूरी व्यवस्था पहले से तय है।
इसके बदले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से लाखों रुपये वसूले जाते थे। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क पिछले कई वर्षों से सक्रिय था और इसके माध्यम से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से परीक्षा दिलाई गई हो सकती है।
गिरोह के खुलासे की कहानी भी बेहद दिलचस्प बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों ने अपने परिजनों को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के लिए इसी तरीके का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। यहीं से पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ।
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य रविशंकर ने पिछले वर्ष अपनी पत्नी की जगह एक सॉल्वर को परीक्षा में बैठाया था, जो पकड़ी गई थी। इसके बावजूद उसने इस वर्ष फिर वही कोशिश की और पत्नी की जगह एक अन्य युवती को परीक्षा दिलाने भेजा। हालांकि, इस बार भी मामला खुल गया और संबंधित सॉल्वर को गिरफ्तार कर लिया गया।
इसी तरह गिरोह के एक अन्य सदस्य रंजीत पर आरोप है कि उसने अपने भाई को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए एक वास्तविक एमबीबीएस छात्र को सॉल्वर बनाया। यह छात्र परीक्षा केंद्र पर पहुंचा, लेकिन पहचान संबंधी जांच के दौरान संदेह होने पर पकड़ा गया। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया।
अब जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। पुलिस को शक है कि इस पूरे रैकेट में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं जिन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने में भूमिका निभाई। जांच का दायरा कोटा के उन हॉस्टलों, कोचिंग संस्थानों और संपर्क सूत्रों तक बढ़ाया गया है, जहां से इस नेटवर्क का संचालन होने की आशंका है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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