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शंकराचार्य की टिप्पणी से आहत उपायुक्त कर प्रशांत सिंह ने दिया इस्तीफा, योगी–मोदी के समर्थन में लिया बड़ा फैसला

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Shankaracharya's remarks hurt

बोलता सच,अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की कथित टिप्पणियों से आहत होकर अयोध्या में तैनात राज्य कर विभाग के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) प्रशांत सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने की घोषणा की है।

इस्तीफे की घोषणा करते हुए प्रशांत सिंह ने कहा कि वह अयोध्या में राज्य कर विभाग में उपायुक्त के पद पर कार्यरत हैं। बीते कुछ दिनों से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लगातार अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं, जिससे वह व्यक्तिगत रूप से आहत हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक वेतनभोगी कर्मचारी हूं, लेकिन मेरे अंदर भी दिल है। देश के संविधान, राज्य व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता के लिए ऐसी टिप्पणियां गैरजिम्मेदाराना हैं।”

प्रशांत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुने गए हैं और संवैधानिक पदों पर आसीन हैं। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना न केवल अनुचित बल्कि आहत करने वाला भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सरकार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के समर्थन में तथा शंकराचार्य की टिप्पणियों के विरोध में अपना इस्तीफा दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं एक नौकरीपेशा व्यक्ति हूं। मेरा जीवन और परिवार इस सरकार की वजह से चल रहा है। सरकार मेरे बॉस की तरह है। ऐसे में जब सरकार के मुखिया के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की जाती है, तो उसका विरोध करना मेरा कर्तव्य बनता है।”

‘लोगों को बरगलाकर इस्तीफा दिला रहे हैं शंकराचार्य’

प्रशांत सिंह ने आरोप लगाया कि हाल ही में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे के मामले में भी शंकराचार्य की भूमिका सामने आई है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य द्वारा यह कहना कि इस्तीफा देने वालों को धर्म के क्षेत्र में बड़ा पद दिया जाएगा, एक गलत परंपरा को जन्म दे रहा है। “इस तरह लोगों को बरगलाकर इस्तीफा दिलवाना ठीक नहीं है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने आगे कहा कि देश, समाज और राष्ट्र का संचालन चुने हुए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री करते हैं, इसलिए उनके सम्मान से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। “हम सरकारी कर्मचारी अपनी गाड़ियों पर ‘उत्तर प्रदेश शासन’ लिखकर चलते हैं, जो यह दर्शाता है कि हम सरकार का ही हिस्सा हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के अपमान से हम कर्मचारी भी आहत होते हैं,” प्रशांत सिंह ने कहा। इस इस्तीफे के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और इसे मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।


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