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भगवंतनगर में बीजेपी टिकट की होड़, 24 से ज्यादा दावेदारों ने झोंकी ताकत; खर्च और प्रचार को लेकर उठे सवाल

Bolta Sach News
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BJP ticket in Bhagwantnagar

बोलता सच,उन्नाव : उत्तर प्रदेश की भगवंतनगर विधानसभा सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बीजेपी से टिकट की दावेदारी कर रहे 24 से अधिक नेता क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहे हैं। टिकट की उम्मीद लगाए ये दावेदार लगातार जनसंपर्क, सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के जरिए मतदाताओं के बीच अपनी पहचान मजबूत करने में जुटे हैं।

इलाके में कई स्थानों पर संभावित प्रत्याशियों के प्रचार से जुड़ी दीवारें नजर आ रही हैं। कोई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है तो कोई सांस्कृतिक आयोजन के जरिए लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रहा है। कहीं सम्मान समारोह हो रहे हैं, तो कहीं जरूरतमंदों की मदद और बड़े उपहारों के जरिए सामाजिक छवि मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

धनबल और रुतबे के सहारे बढ़ रही सक्रियता

चुनाव से काफी पहले संभावित उम्मीदवारों की इस तरह की सक्रियता कोई नई बात नहीं है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनाव से एक-दो साल पहले कई दावेदार सामाजिक गतिविधियों के जरिए मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करते हैं।

आज इसमें सोशल मीडिया की भी बड़ी भूमिका है। संभावित प्रत्याशियों की अपनी सोशल मीडिया टीमें हैं, जो उनके कार्यक्रमों, जनसेवा और लोगों से मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर साझा करती हैं। इससे दावेदारों को क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक और सामाजिक छवि बनाने में मदद मिलती है।

आखिर इतना पैसा कहां से आ रहा है?

इन गतिविधियों के बीच क्षेत्र के लोगों के बीच एक सवाल भी चर्चा में है कि इतने बड़े स्तर पर खर्च किए जा रहे पैसे का स्रोत क्या है। महंगाई के दौर में जहां आम परिवारों के लिए रोजमर्रा का खर्च चलाना चुनौती बना हुआ है, वहीं कुछ संभावित प्रत्याशी सामाजिक आयोजनों और प्रचार पर कथित तौर पर खूब पैसा खर्च कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि क्या यह खर्च निजी कमाई से किया जा रहा है या इसके पीछे कोई अन्य स्रोत है। हालांकि, इन दावेदारों की आय और खर्च के स्रोतों को लेकर किसी तरह का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।

गांव-गांव सक्रिय हो रहे ‘वोट के ठेकेदार’

रिटायर्ड शिक्षक और राजनीति के जानकार भगवती सिंह का कहना है कि युवा मतदाताओं का एक वर्ग पैसा और प्रभाव रखने वाले लोगों से प्रभावित हो सकता है, लेकिन ऐसा हर मतदाता के साथ नहीं है। उनके मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में अब भी बड़ी संख्या में मतदाता अपने विवेक से फैसला करते हैं। भगवती सिंह कहते हैं कि गांव-गांव में वोट के ठेकेदार जैसी भूमिका निभाने वाले लोग जरूर सक्रिय हैं, लेकिन मतदाता अब पहले की तरह आसानी से उनके प्रभाव में नहीं आते।

राजनीति सेवा नहीं, निवेश बनती जा रही है?

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र सिंह के मुताबिक, राजनीति में सेवा की भावना के साथ-साथ निवेश की मानसिकता भी बढ़ती दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि चुनाव से पहले जनता के बीच किया गया खर्च कई बार चुनाव के बाद किसी न किसी रूप में वसूलने की प्रवृत्ति को जन्म देता है।

उनके मुताबिक लोकतंत्र में जनता ही असली मालिक है। यदि मतदाता किसी भी प्रकार के लालच और प्रभाव से ऊपर उठकर मतदान करें, तो राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों पर भी सेवा की राजनीति करने का दबाव बनेगा। तभी चुनाव लोकतंत्र का पर्व रहेगा, व्यापार नहीं।

बीजेपी से टिकट की उम्मीद में सभी दावेदार

भगवंतनगर सीट पर बीजेपी का टिकट आखिर किसे मिलेगा, यह फिलहाल तय नहीं है। पार्टी को एक ही उम्मीदवार चुनना होगा, जिसके बाद बाकी दावेदारों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी। फिलहाल क्षेत्र में सक्रिय लगभग हर संभावित प्रत्याशी और उसके समर्थक खुद को टिकट का मजबूत दावेदार मान रहे हैं। जनसंपर्क और सामाजिक आयोजनों के जरिए सभी अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं। अब देखना होगा कि 2027 के चुनाव में बीजेपी का भरोसा किस चेहरे पर जाता है और टिकट की इस लंबी दौड़ में कौन बाजी मारता है।


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