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भारत-ईयू ऐतिहासिक FTA पर मुहर, सस्ती होंगी कारें-बीयर! लेकिन कब मिलेगा आम आदमी को फायदा?

Bolta Sach News
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India-EU seal historic FTA

बोलता सच,नई दिल्ली। लंबे इंतजार के बाद 27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लग गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया है। समझौते के तहत यूरोपीय कारों, बीयर, वाइन, मशीनरी और कई उत्पादों पर लगने वाला भारी टैक्स घटेगा या खत्म होगा। हालांकि, इसका सीधा असर जेब पर कब पड़ेगा—यह बड़ा सवाल है।

डील के बाद सस्ता सामान कब मिलेगा?

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, समझौते को लागू होने में समय लगेगा। संभावना है कि यह अगले साल से चरणबद्ध तरीके से लागू होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जीरो टैरिफ का पूरा फायदा मिलने में 5 साल या उससे अधिक का वक्त लग सकता है। यानी तुरंत कीमतों में गिरावट की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।

लग्जरी कारों पर कितना फायदा?

यूरोप से आयात होने वाली मर्सिडीज, ऑडी जैसी कारों पर भारी-भरकम ड्यूटी को धीरे-धीरे घटाकर 10% किया जाएगा। हालांकि यह रियायत सालाना सिर्फ 2.5 लाख कारों के कोटे तक सीमित रहेगी।

बीयर, वाइन और खाने-पीने की चीजें होंगी सस्ती?
  • यूरोपीय बीयर पर टैरिफ घटाकर 50%

  • वाइन पर 20–30% तक ड्यूटी में कटौती

  • फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड पर टैरिफ खत्म

  • ऑलिव ऑयल और अन्य वेजिटेबल ऑयल पर भी ड्यूटी कम

उद्योग और फैक्ट्री मालिकों को क्या मिलेगा फायदा?


यह डील मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है।

  • मशीनरी पर 44% तक लगने वाली ड्यूटी लगभग खत्म

  • केमिकल्स (22%) और दवाओं (11%) पर टैक्स हटेगा

  • मेडिकल उपकरणों के 90% उत्पादों पर टैरिफ शून्य, जिससे इलाज सस्ता हो सकता है

एविएशन और भविष्य की तकनीक पर असर

एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट से जुड़े लगभग सभी उत्पादों पर टैरिफ जीरो किया जाएगा, जिससे भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर को बड़ा फायदा होगा।

डील का कुल दायरा कितना बड़ा है?

ईयू के अनुसार, भारत को निर्यात होने वाले 90% से ज्यादा यूरोपीय उत्पादों पर टैक्स या तो खत्म होगा या घटेगा। इससे यूरोपीय कंपनियों को सालाना करीब 4 अरब यूरो की बचत होगी। ईयू को उम्मीद है कि 2032 तक भारत को होने वाला उनका निर्यात दोगुना हो जाएगा।

क्या सर्विस सेक्टर भी शामिल है?

हां। इस समझौते के तहत यूरोपीय सेवा प्रदाताओं को भारत के बैंकिंग, इंश्योरेंस और समुद्री सेवाओं में विशेष पहुंच मिलेगी।  भारत-ईयू एफटीए को ऐतिहासिक इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह व्यापार, निवेश और तकनीक—तीनों मोर्चों पर बड़े बदलाव लाएगा। हालांकि आम उपभोक्ता को तुरंत सस्ते दाम न दिखें, लेकिन आने वाले वर्षों में इसका असर कार से लेकर इलाज और रोजमर्रा की चीजों तक साफ नजर आ सकता है।

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