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सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक के प्रस्ताव का विरोध, बीएचएसए ने उठाए सवाल

Bolta Sach News
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Private practice of government doctors
बोलता सच,पटना : पटना में बिहार सरकार के उस प्रस्ताव को लेकर विरोध तेज हो गया है, जिसमें सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की बात कही गई है। बिहार हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (बीएचएसए) ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे अव्यावहारिक बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि जब तक सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर नहीं की जाती, तब तक डॉक्टरों पर इस तरह की पाबंदी लगाना उचित नहीं है।
बीएचएसए ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगाना चाहती है, तो डॉक्टरों को इसके बदले उचित नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) दिया जाना चाहिए। एसोसिएशन के मुताबिक, बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के यह फैसला डॉक्टरों के साथ अन्याय होगा।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बैठक कर सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा की और कहा कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में अब भी पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव है। कई जगहों पर मेडिकल उपकरण खराब हैं या उपलब्ध ही नहीं हैं। इसके अलावा डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। ऐसे हालात में स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव डालने से व्यवस्था और कमजोर हो सकती है।
गौरतलब है कि निजी प्रैक्टिस पर रोक का प्रस्ताव बिहार सरकार के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना है। हालांकि, बीएचएसए का कहना है कि पहले अस्पतालों की कमियों को दूर किया जाए, काम करने का माहौल बेहतर बनाया जाए और डॉक्टरों को उचित प्रोत्साहन दिया जाए, उसके बाद ही ऐसे किसी बड़े सुधार पर विचार होना चाहिए।

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