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पंचायत चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल, हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी तारीखें

Bolta Sach News
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There was increased commotion regarding the Panchayat elections.
बोलता सच,लखनऊ/मऊ : उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव में हो रही देरी, पंचायत प्रतिनिधियों का समाप्त होता कार्यकाल और जमीनी स्तर पर बढ़ती बेचैनी ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। इसी बीच पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने साफ कर दिया है कि सरकार चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन मामला फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के कारण तारीखों का ऐलान नहीं किया जा सकता। कोर्ट के आदेश के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
लखनऊ स्थित पंचायती राज निदेशालय, लोहिया भवन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला इस मुद्दे को लेकर चर्चा का केंद्र बन गई। कार्यशाला के दौरान ब्लॉक प्रमुख संघ के पदाधिकारियों ने चुनाव में देरी पर नाराजगी जताते हुए जोरदार विरोध दर्ज कराया। उन्होंने मांग की कि यदि समय पर चुनाव संभव नहीं है, तो वर्तमान पदाधिकारियों को प्रशासक बनाकर उनका कार्यकाल बढ़ाया जाए। इस दौरान कुछ समय के लिए नारेबाजी और हंगामे की स्थिति भी बनी रही।
संघ के अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह सेनानी और संरक्षक जगमोहन सिंह यादव के नेतृत्व में पंचायत प्रतिनिधियों ने मंत्री को 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रशासक नियुक्ति, सरकारी वाहन की सुविधा, एक करोड़ रुपये का बीमा और सरकारी कार्यक्रमों में ब्लॉक प्रमुखों की भागीदारी जैसी मांगें शामिल रहीं। प्रतिनिधियों का आरोप था कि पहले भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी प्रस्ताव जनहित में होंगे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा। कार्यकाल बढ़ाने के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा, लेकिन वह इस प्रस्ताव को जरूर आगे बढ़ाएंगे।
कार्यशाला में अन्य राज्यों जैसे राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड के मॉडल पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि इन राज्यों की तरह प्रशासक समिति बनाकर कार्यकाल बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। मंत्री ने कहा कि यदि इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव दिया जाता है, तो उस पर भी विचार संभव है।
इस दौरान मंत्री ने एक अहम घोषणा करते हुए ब्लॉक प्रमुखों की विकास निधि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण विकास कार्यों को गति मिलेगी और योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
फिलहाल पूरे प्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर आम जनता तक सभी की नजरें अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में पंचायत व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

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