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ओवैसी का बयान—“भारत के बंटवारे के लिए केवल मुसलमान नहीं, कांग्रेस भी जिम्मेदार”

Bolta Sach News
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Owaisi's statement India's partition
बोलता सच,नई दिल्ली/सूरत : असदुद्दीन ओवैसी ने भारत के विभाजन को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। गुजरात के सूरत के लिंबायत में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि देश के बंटवारे के लिए केवल मुसलमान जिम्मेदार नहीं थे, बल्कि कांग्रेस पार्टी के नेता भी इसमें शामिल थे।

ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि यह कहना गलत है कि भारत का विभाजन मुसलमानों की वजह से हुआ। उन्होंने तर्क दिया कि उस समय बड़ी संख्या में मुसलमानों को मतदान का अधिकार ही नहीं था, ऐसे में पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना का जिक्र करते हुए कहा कि विभाजन में उनकी भूमिका जरूर थी, लेकिन इसके साथ ही कांग्रेस नेतृत्व की भी जिम्मेदारी बनती है।

अपने बयान में ओवैसी ने स्वतंत्रता संग्राम के वरिष्ठ नेता मौलाना अबुल कलाम आजाद का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मौलाना आजाद ने अपनी पुस्तक India Wins Freedom में लिखा है कि उन्होंने देश के बंटवारे को रोकने के लिए भरपूर प्रयास किए थे। ओवैसी के अनुसार, आजाद ने महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू से भी अपील की थी कि देश का विभाजन न होने दिया जाए, लेकिन उनकी बात पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

ओवैसी ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन को लेकर विरोधियों में डर है, क्योंकि वे मुस्लिम नेतृत्व को उभरते हुए नहीं देखना चाहते। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार ‘पार्टिशन’ का हवाला देकर मुसलमानों को दोषी ठहराने की कोशिश की जाती है, जो कि ऐतिहासिक तथ्यों के अनुरूप नहीं है।

इसके साथ ही ओवैसी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी को ‘बीजेपी की बी टीम’ बताना गलत है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर अन्य दलों को भरोसा है, तो वे बाकी सीटों पर जीत हासिल कर भारतीय जनता पार्टी को हरा सकते हैं।

ओवैसी ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव के लिए ममता बनर्जी और उनकी सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने अल्पसंख्यक बहुल इलाकों की अनदेखी की है, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उनके अनुसार, कई क्षेत्रों में न तो पर्याप्त स्कूल हैं और न ही अस्पतालों में उचित सुविधाएं उपलब्ध हैं।

ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज होने की संभावना है, क्योंकि भारत के विभाजन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दिए गए ऐसे बयान अक्सर व्यापक राजनीतिक प्रतिक्रिया को जन्म देते हैं।



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