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देवरिया में सिर कटा शव मिलने की गुत्थी सुलझी, बेटा ही निकला कातिल

Bolta Sach News
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Deoria me sar kata
बोलता सच : देवरिया में सौतेले बेटे ने 50 हजार की सुपारी देकर अपने पिता की हत्या करा दी। वह अपने बड़े भाई को ज्यादा जमीन देने से नाराज था। पुलिस ने सौतेले बेटे समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। 3 आरोपी अभी फरार हैं। मामला रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र का है।
फतेहपुर गांव में रहने वाले धनंजय पाल (55) डीडीएन पब्लिक स्कूल नाम से 8वीं तक का स्कूल चलाते थे। उनका स्कूल घर से करीब 500 मीटर दूर रामनगर टोला में है। धनंजय पाल की एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है। स्कूल चलाने में धनंजय अपने भतीजे संजीव उर्फ पिंटू की मदद लेते थे और उसी के साथ रहते थे। उनका दूसरा भतीजा पंकज पाल मर्चेंट नेवी में मुंबई में काम करता है। तीसरा भतीजा मृत्युंजय पाल पूना में रहता है।
धनंजय के बड़े भाई हरी लाल का 30 साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार और ग्रामीणों के कहने पर धनंजय ने अपनी भाभी से शादी कर ली थी। भाई के तीन बेटे थे, धनंजय ने तीनों बेटों को भी अपना लिया था। इसी बीच धनंजय की एक बेटी भी हुई। धनंजय पाल शादी के बाद 20 साल तक ओमान में रहकर नौकरी करते रहे। इस बीच उन्होंने काफी अच्छा पैसा कमाया। गांव में ही कुछ खेत भी खरीदे। उसी जमीन पर गांव में स्कूल बनवाया था, जिसकी देख-रेख संजीव कर रहा था। यह बात उसके भाई मृत्युंजय को खटकती थी।
अब पढ़िए आरोपियों का कबूलनामा
गिरफ्तार आरोपियों अमन निषाद और मृत्युंजय पाल ने बताया कि धनंजय पाल संजीव को अधिक मानते थे। वह हमेशा घर पर रहकर परिवार की देखभाल करता था। इसलिए स्कूल और अपने हिस्से की जमीन उसे देने की बात करते थे। यह बात मृत्युंजय को अच्छी नहीं लगती थी। उसने इसका विरोध भी किया था, लेकिन धनंजय नहीं माने। इसीलिए उसने अपने सौतेले पिता की हत्या की योजना बनाई। इसके लिए गांव के एक युवक से संपर्क किया, जिसने हत्या के हम लोगों से मिलवाया। इसके बाद हम पांच लोगों ने मिलकर 27 जून की रात में स्कूल में जाकर कुल्हाड़ी से चेहरे पर वार कर हत्या कर दी।
अब एक नजर 27 जून के घटनाक्रम पर
27 जून को स्कूल प्रबंधक धनंजय पाल की गला काटकर हत्या कर दी गई थी। वह स्कूल के बरामदे में सो रहे थे, तभी हमलावरों ने कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर उनकी गर्दन धड़ से अलग कर दी थी। वारदात के बाद आरोपी कुल्हाड़ी को स्कूल से 100 मीटर दूर झाड़ियों में फेंककर भाग गए थे।
28 जून की सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले ग्रामीणों ने स्कूल के बरामदे में खून से लथपथ शव देखा। उन्होंने इसकी सूचना घरवालों और पुलिस को दी। इसके बाद रुद्रपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया था।
धनंजय की पत्नी मुराती देवी की शिकायत पर रुद्रपुर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। हत्या की सूचना पर एसपी और फारेंसिक टीम पहुंची और साक्ष्य को एकत्र किया। पुलिस ने हत्याकांड खुलासा करने के लिए चौकीदार समेत 4 लोग को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
जानें कैसे हुआ मामले का खुलासा
एसपी ने हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस की 3 टीमों को लगाया। एसओजी और सर्विलांस टीम ने मृतक और उनके परिजनों के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली। मृत्युंजय के मोबाइल में कुछ संदिग्ध नंबर मिले, जिन पर पिछले कुछ दिनों से लगातार काफी देर-देर तक बात हो रही थी।
इसके साथ ही उन नंबर पर वॉट्सऐप कॉलिंग भी हुई थी। पुलिस इन नंबरों को संदिग्ध मानकर जांच कर ही रही थी। इसी बीच मृत्युंजय ने एक नंबर पर 13000 का फोन-पे किया। वह नंबर हत्याकांड के बाद से ही बंद चल रहा था।
कुछ देर खुलने के बाद ही वह नंबर फिर से बंद हो गया। इसी के सहारे पुलिस अभियुक्त अमन निषाद और मृत्युंजय पाल तक पहुंच गई। दोनों को गिरफ्तार करने के बाद कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने घटना के बारे में पुलिस को बताया।
पुलिस ने बताया कि धनंजय पाल की हत्या के लिए मृत्युंजय ने गांव के अमन निषाद से संपर्क किया था। उसने सुरौली थाना क्षेत्र के पटखौली गांव के रहने वाले कमरुद्दीन उर्फ तालिबान से मिलवाया था। उसने 50 हजार रुपए में हत्या की सुपारी ली थी। उसने अपने दो और दोस्तों के साथ मिलकर 27 जून की रात में धनंजय पाल की हत्या की थी।

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