सपा सांसद ने कहा कि पिछले दस वर्षों में 70 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाएं पेपर लीक के कारण प्रभावित या रद्द हो चुकी हैं। उन्होंने NEET, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और जूनियर इंजीनियर जैसी परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हर बार सबसे ज्यादा नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को उठाना पड़ता है।
बर्क ने कहा कि लाखों परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं। छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं और कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले ही पर्चे बाजार में बिक जाते हैं। इसके बाद परीक्षा रद्द हो जाती है और युवाओं के हिस्से में केवल तनाव, निराशा और बेरोजगारी आती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश का युवा डिग्री हासिल करने के बाद छोटी-छोटी नौकरियों के लिए आवेदन करने को मजबूर है, लेकिन वहां भी पारदर्शिता और ईमानदारी दिखाई नहीं दे रही। सांसद ने कहा कि हर बड़ी परीक्षा में पेपर लीक होना सरकार की नीयत और व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जियाउर्रहमान बर्क ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि आखिर हर परीक्षा में पर्चा कैसे लीक हो जाता है और इसके पीछे कौन लोग हैं, यह सामने आना चाहिए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की भी मांग की।
सांसद ने कहा कि वह संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के सदस्य हैं और आने वाली बैठक में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युवाओं के भविष्य के साथ इसी तरह खिलवाड़ होता रहा तो आने वाली पीढ़ियों का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ जाएगा।
अपने बयान के अंत में बर्क ने बड़ा राजनीतिक सवाल उठाते हुए कहा, “कहीं ऐसा तो नहीं कि युवाओं को नौकरी न देने के लिए पेपर लीक को ही एक हथियार बना दिया गया हो?” उनके इस बयान के बाद प्रदेश से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक माहौल गरमा गया है।