बोलता सच,नई दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद Sonia Gandhi ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित संसद के विशेष सत्र और उससे जुड़े विधेयकों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान बहस का असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है, जिसे उन्होंने “बेहद खतरनाक” और “संविधान पर हमला” बताया।
अपने लेख में, जो ‘द हिंदू’ अखबार में प्रकाशित हुआ, सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि Narendra Modi सरकार जल्दबाजी में फैसले लेकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है और विपक्ष को दबाव में डालना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष सत्र बुलाने का समय और तरीका सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल चरम पर है।
महिला आरक्षण बनाम परिसीमन
सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को सर्वसम्मति से पारित किया था, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया गया है। हालांकि, यह आरक्षण जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार अब इस प्रावधान में संशोधन कर 2029 से इसे लागू करना चाहती है, तो इसमें 30 महीने का समय क्यों लगा और विशेष सत्र के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है।
संवाद की कमी और विपक्ष की अनदेखी
सोनिया गांधी ने कहा कि विपक्ष ने कई बार सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया, ताकि प्रस्तावों पर चर्चा हो सके, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके बजाय प्रधानमंत्री द्वारा लेख और सार्वजनिक अपीलों के जरिए समर्थन मांगना “एकतरफा रवैये” को दर्शाता है।
जनगणना में देरी और उसके प्रभाव
उन्होंने जनगणना में देरी को भी गंभीर मुद्दा बताया। उनके अनुसार, 2021 में होने वाली जनगणना को टालने के कारण करोड़ों लोग ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ के लाभ से वंचित रह गए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल जनगणना के नाम पर 2027 तक आंकड़े आने की बात करना देरी को जायज ठहराने जैसा है।
जाति जनगणना पर सवाल
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जाति आधारित जनगणना को लेकर स्पष्ट नहीं है और इसे टालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में जाति सर्वेक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है।
अतीत से सीख और सहमति की जरूरत
उन्होंने 1993 के 73वें और 74वें संविधान संशोधनों का हवाला देते हुए कहा कि बड़े फैसलों के लिए व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी होती है। इन संशोधनों के जरिए स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिला, जो आज एक बड़ी उपलब्धि है।
सोनिया गांधी ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में इतने बड़े संवैधानिक बदलाव जल्दबाजी में नहीं किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है, जिसे बिना पर्याप्त चर्चा के लागू करना देश की संघीय संरचना और संवैधानिक संतुलन के लिए खतरनाक हो सकता है।
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