हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैठक में भाजपा संगठन महामंत्री बीएल संतोष और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह भी मौजूद रहे। करीब सवा दो घंटे चली इस बैठक में नई प्रदेश टीम के गठन और संगठन में व्यापक फेरबदल पर चर्चा होने की बात सामने आ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी इस बार संगठन में “ग्राउंड परफॉर्मेंस” को सबसे ज्यादा महत्व देने जा रही है। लंबे समय से पार्टी के लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन में जगह देने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि सिफारिशों और दबाव की राजनीति को इस बार ज्यादा महत्व नहीं दिया जाएगा।
भाजपा नेतृत्व नई ऊर्जा और नए चेहरों के साथ 2027 का चुनाव लड़ने की रणनीति बना रहा है। इसी कारण प्रदेश संगठन में बदलाव के साथ-साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी उत्तर प्रदेश के नेताओं को स्थान मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि राष्ट्रीय स्तर पर यूपी के नेताओं को नई जिम्मेदारियां मिलती हैं, तो प्रदेश इकाई में कई पद खाली हो सकते हैं, जिन पर नए चेहरों को मौका मिलेगा।
सूत्रों के अनुसार, 22 मई को एक और महत्वपूर्ण बैठक हो सकती है, जिसमें नई टीम के नामों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह दोबारा केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और बीएल संतोष के साथ संगठनात्मक बदलावों पर विस्तृत चर्चा होगी।
भाजपा इस बार संगठन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। नई टीम में ओबीसी, एससी-एसटी और महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिए जाने की तैयारी है। पार्टी का मानना है कि सामाजिक संतुलन और जमीनी पकड़ वाले नेताओं को आगे लाकर चुनावी रणनीति को और मजबूत किया जा सकता है।
इसके अलावा, क्षेत्रीय समीकरणों को भी ध्यान में रखा जाएगा। पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, अवध, बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्र से ऐसे नेताओं को मौका दिए जाने की चर्चा है, जिन्होंने लंबे समय तक संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है।
भाजपा सूत्रों का दावा है कि नई राज्य इकाई में लगभग 60 प्रतिशत पद ऐसे कार्यकर्ताओं को दिए जा सकते हैं, जो वर्षों से संगठन के लिए समर्पित भाव से काम कर रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाना है।
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