बोलता सच,नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने से राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा असर देखने को मिल रहा है। इस घटनाक्रम से जहां अरविंद केजरीवाल की पार्टी को झटका लगा है, वहीं बीजेपी को एक साथ कई राजनीतिक फायदे मिलने की बात कही जा रही है।
इन सांसदों के शामिल होने के बाद राज्यसभा में बीजेपी की ताकत बढ़कर 113 हो गई है, जबकि NDA का आंकड़ा भी करीब 150 तक पहुंच गया है। इससे संसद में सरकार की स्थिति और मजबूत होती दिखाई दे रही है।
पंजाब में बढ़ी चुनौती
विश्लेषकों के मुताबिक, इस सियासी बदलाव का सबसे ज्यादा असर पंजाब में देखने को मिल सकता है, जहां भगवंत मान के नेतृत्व में AAP की सरकार है। पहले से ही पार्टी के कुछ विधायकों के असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में सांसदों के इस कदम से सरकार के सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
AAP के रणनीतिकार माने जाने वाले संदीप पाठक और राघव चड्ढा जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने से संगठनात्मक स्तर पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
गुजरात और गोवा पर भी असर
गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में AAP खुद को विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन इस घटनाक्रम से उसकी रणनीति को झटका लग सकता है। राजनीतिक विश्लेषक आशीष रंजन के अनुसार, स्थानीय निकाय चुनाव से पहले इस तरह का बदलाव पार्टी के विस्तार अभियान पर ब्रेक लगा सकता है।
क्या डैमेज कंट्रोल कर पाएगी AAP?
विश्लेषकों का मानना है कि AAP के पास अभी भी अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और भगवंत मान जैसे बड़े चेहरे मौजूद हैं, जो पार्टी को संभाल सकते हैं। हालांकि, संगठनात्मक स्तर पर हुए इस नुकसान की भरपाई आसान नहीं होगी।
BJP पर AAP का पलटवार
AAP सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में AAP के बढ़ते प्रभाव से घबराकर बीजेपी इस तरह के कदम उठा रही है।
राघव चड्ढा का बयान
AAP छोड़ने के बाद राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने डर की वजह से नहीं बल्कि हताशा के कारण पार्टी छोड़ी है। उन्होंने कहा कि पार्टी में अब ईमानदारी से काम करने वालों के लिए जगह नहीं बची है और यही कारण है कि कई नेता लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले चुनावों में इसका असर कितना गहरा होगा, यह देखना अहम होगा।
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