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बकरीद से पहले गाय की कुर्बानी पर गरमाई बहस, इकबाल अंसारी बोले- ‘गौमाता का सम्मान करें, राष्ट्रीय पशु घोषित हो’

Bolta Sach News
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Cow sacrifice before Bakrid
बोलता सच,अयोध्या : उत्तर प्रदेश में बकरीद नजदीक आते ही सड़कों पर नमाज और गायों की कुर्बानी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी बीच बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी Mohammad Iqbal Ansari ने गाय की कुर्बानी का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमानों को गाय का सम्मान करना चाहिए और सरकार को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए।

इकबाल अंसारी ने कहा कि “हम हिंदुस्तान के मुसलमान हैं। गाय को गौमाता कहा जाता है, इसलिए मुसलमानों को भी उसका सम्मान करना चाहिए। गाय की कुर्बानी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में गाय पूजनीय है और देश में भाईचारा बनाए रखने के लिए सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान जरूरी है।

उन्होंने आगे कहा कि गाय एक शांत और उपयोगी पशु है, जिसका दूध औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। उनके मुताबिक इस्लाम भी गौहत्या की अनुमति नहीं देता और कुछ लोग जानबूझकर मुसलमानों को बदनाम करने के लिए ऐसे काम करते हैं।

इकबाल अंसारी ने समाज से अपील करते हुए कहा कि लोग गायों की सेवा करें, उन्हें चारा खिलाएं और उनका सम्मान करें। साथ ही उन्होंने कहा कि चाहे कोई हिंदू हो या मुसलमान, अगर कोई गौमाता के साथ गलत व्यवहार करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने Yogi Adityanath से मांग करते हुए कहा कि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे। अंसारी ने अयोध्या के संतों की इस मांग का समर्थन भी किया और कहा कि आपसी सम्मान और भाईचारे से ही देश में शांति बनी रह सकती है।

वहीं, कांग्रेस नेता Hussain Dalwai ने भी इकबाल अंसारी के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर गौहत्या से हिंदू समाज की भावनाएं आहत होती हैं तो गायों की कुर्बानी नहीं दी जानी चाहिए। दलवाई ने कहा कि लोग बकरियों की कुर्बानी दे सकते हैं, ऐसे में गाय की कुर्बानी की कोई आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म में गाय की पूजा की जाती है और इस्लाम भी गाय के मांस के सेवन को उचित नहीं मानता। इसलिए सभी को गायों का सम्मान करना चाहिए और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना चाहिए।


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