Breaking News

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: एसआईटी ने सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट, ट्रस्ट पुनर्गठन और एफआईआर की सिफारिश

Bolta Sach News
|
Ram Temple offerings case
बोलता सच,लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की धनराशि और अन्य मूल्यवान वस्तुओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। 20 पन्नों की इस रिपोर्ट में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया, चढ़ावे की गणना प्रणाली और निगरानी तंत्र को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही मामले की विस्तृत जांच कराने की सिफारिश भी की गई है।
सूत्रों के अनुसार, लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी। रिपोर्ट में किसी भी जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी या ट्रस्ट पदाधिकारी को क्लीनचिट नहीं दी गई है। जांच टीम ने कई स्तरों पर संभावित अनियमितताओं की ओर संकेत करते हुए आगे गहन पड़ताल की आवश्यकता बताई है।
रिपोर्ट में मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की गई है। साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन पर भी विचार करने का सुझाव दिया गया है। एसआईटी का मानना है कि मंदिर जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक संस्था के संचालन के लिए अधिक पारदर्शी और पेशेवर प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
जांच टीम ने पिछले पांच वर्षों के दौरान मंदिर में प्राप्त चढ़ावे और दान की राशि का विशेष ऑडिट कराने की भी सिफारिश की है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि मंदिर के प्रशासनिक संचालन के लिए किसी वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीओओ) नियुक्त किया जाए, जिससे वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की बेहतर निगरानी हो सके।
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि केवल नकदी ही नहीं, बल्कि मंदिर में चढ़ाए गए कुछ आभूषणों और शिलाओं के संबंध में भी सवाल सामने आए हैं। इन मामलों की भी विस्तृत जांच किए जाने की आवश्यकता जताई गई है।
रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल किए गए हैं। इनमें चढ़ावे की धनराशि का साप्ताहिक ऑडिट, प्राप्त नकदी की प्रतिदिन एंट्री, सीसीटीवी फुटेज के स्टोरेज की अवधि 45 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करना तथा जांच पूरी होने तक आरोपित व्यक्तियों के अयोध्या छोड़ने पर रोक लगाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
एसआईटी ने बताया कि जांच के दौरान ट्रस्ट और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े कई लोगों सहित लगभग 150 व्यक्तियों से पूछताछ की गई। इनमें मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, राजेश पाठक, रमाशंकर, अविनाश शुक्ला, कृष्णदेव तिवारी और सुभाष समेत कई नाम शामिल हैं। पूछताछ के आधार पर टीम ने कई बिंदुओं पर अतिरिक्त जांच की आवश्यकता महसूस की है।
उधर, रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका गुप्ता ने अयोध्या पहुंचकर रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है तो रिपोर्ट को सार्वजनिक कर जनता के सामने रखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई और कथित रूप से गायब हुई वस्तुओं की बरामदगी को लेकर भी सवाल उठाए।
वहीं, युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने इस पूरे प्रकरण को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए देश के चारों शंकराचार्यों को पत्र लिखकर हस्तक्षेप और मार्गदर्शन की मांग की है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद राज्य सरकार जल्द ही आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कदम उठा सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इसे भी पढ़े : फिरोजाबाद में प्रेमी युगल के शव नहर में मिले, दुपट्टे से बंधे थे हाथ; आत्महत्या की आशंका


Discover more from Bolta Sach News - बोलता सच न्यूज़ - सच लिखने का साहस

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Reply

error: