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शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक: एसआईआर, राष्ट्रीय सुरक्षा, संघीय ढांचा और वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों पर गर्माई राजनीति

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All-party meeting before the winter session

बोलता सच : संसद के शीतकालीन सत्र से ठीक पहले केंद्र सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें 36 दलों के 50 नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।
बैठक में मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा छाया रहा। इसके अलावा दिल्ली धमाके के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा, श्रम संहिता, संघीय ढांचे से जुड़े विवाद, तथा वायु प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।


सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने उठाए कई गंभीर मुद्दे

सीपीआई के राज्यसभा सांसद पी. संतोष कुमार ने बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने हाल ही में लाल किले के पास हुए धमाके को सुरक्षा एजेंसियों की चूक बताते हुए कहा कि इतनी संवेदनशील जगह पर विस्फोट होना खुफिया व्यवस्था और तैयारी की कमजोरी की ओर इशारा करता है।

संतोष कुमार ने चुनाव आयोग के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग विपक्ष की चिंताओं पर ध्यान नहीं दे रहा और एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने कहा कि आयोग की निष्पक्षता ही लोकतंत्र की रीढ़ है और विपक्ष की वैध आपत्तियों को नज़रअंदाज़ करना संस्थागत कमजोरी का संकेत है।

उन्होंने ‘ऑपरेशन कगार’ का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों में निर्दोष लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया के निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों को प्राकृतिक संपत्ति से हटाकर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

केरल से सांसद कुमार ने केंद्र पर यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से राज्य के हिस्से की भारी राशि रोकी जा रही है, जिससे विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली-उत्तर भारत में लगातार बिगड़ते एयर क्वालिटी इंडेक्स को राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट बताते हुए तत्काल राष्ट्रीय रणनीति की मांग की।


संसद के छोटे सत्रों पर भी उठे सवाल

सीपीआई सांसद ने कहा कि संसद के सत्र लगातार छोटे होते जा रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक बहस संभव नहीं हो पाती। उनका कहना था कि सरकार पर्याप्त समय देने के लिए इच्छुक नहीं दिखती।


सरकार का रुख: ‘संसद चले, चर्चा हो’

संसदीय कार्य मंत्री किरें रिजिजू ने बैठक के बाद कहा कि सरकार संसद को सुचारू रूप से चलाने की इच्छुक है और सभी दलों से सहयोग की अपेक्षा करती है।
एसआईआर पर चर्चा की विपक्ष की मांग पर उन्होंने कहा कि सत्र का एजेंडा व्यापार सलाहकार समिति तय करेगी। रिजिजू ने कहा कि मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं लेकिन संसद बाधित नहीं होनी चाहिए।


विपक्ष का आरोप: सर्वदलीय बैठक सिर्फ औपचारिकता

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सर्वदलीय बैठक को केवल औपचारिकता करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने विपक्ष से बिना सलाह के सिर्फ कुछ विषयों पर संक्षिप्त चर्चा तय कर ली है। उन्होंने दावा किया कि यह 15 दिनों का सत्र संसद के इतिहास के सबसे छोटे सत्रों में से एक है, जबकि सरकार 13 विधेयक पारित कराना चाहती है जिनमें से अधिकतर की स्थायी समिति द्वारा समीक्षा नहीं की गई।

कांग्रेस के लोकसभा उप नेता गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय परंपराओं को दबाना चाहती है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, वायु प्रदूषण, मतदाता सूची में गड़बड़ी, विदेश नीति और किसानों के मुद्दे पर चर्चा की मांग की।


एसआईआर पर तीखा रुख—कुछ दलों ने दी चेतावनी

समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि यदि एसआईआर पर चर्चा नहीं कराई गई तो उनकी पार्टी संसद नहीं चलने देगी। उन्होंने दावा किया कि बीएलओ पर “खास वोट हटाने” का दबाव डालने के कारण कई लोगों ने आत्महत्या की।
माकपा नेता जॉन ब्रिटास ने कहा कि संसद बाधित होने की स्थिति में जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली धमाका बताता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर चर्चा जरूरी है।


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