बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कृषि शिक्षा और अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ कृषि क्षेत्र में तकनीक और नवाचार की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में युवाओं को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
सूर्यप्रताप शाही ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश के युवाओं को कृषि एवं तकनीकी क्षेत्र में विश्वस्तरीय अवसर मिलें। इसके लिए विश्वविद्यालयों में आधुनिक संसाधनों, बेहतर अनुसंधान सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा।”
बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे, अनुसंधान गतिविधियों, प्रयोगशालाओं की स्थिति और छात्रों को दी जाने वाली तकनीकी सुविधाओं की भी समीक्षा की गई। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पाठ्यक्रमों को समयानुकूल और रोजगारपरक बनाया जाए, ताकि छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद कृषि और तकनीकी क्षेत्र में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कृषि अनुसंधान को किसानों की जरूरतों से जोड़ने पर भी जोर दिया। मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध कार्यों का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए, जिससे खेती को अधिक लाभकारी और आधुनिक बनाया जा सके।
बैठक में रविंद्र, प्रमुख सचिव कृषि, डॉ. त्रिवेणी दत्त, कुलपति तथा एल.बी. यादव विशेष सचिव कृषि भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने विश्वविद्यालय की वर्तमान व्यवस्थाओं और भविष्य की योजनाओं को लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कृषि शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों, आधुनिक प्रयोगशालाओं और उद्योगों से जुड़ी प्रशिक्षण व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाए। इसके अलावा छात्रों को स्टार्टअप, कृषि आधारित उद्योग और नई तकनीकों के प्रति प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया गया।
राज्य सरकार का मानना है कि मजबूत कृषि शिक्षा व्यवस्था से न केवल युवाओं को बेहतर रोजगार मिलेगा, बल्कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। इसी उद्देश्य के तहत विश्वविद्यालयों में शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।