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कुशीनगर: जच्चा-बच्चा की मौत के बाद डॉक्टर ने मांगे 4 लाख, जिंदा बताकर घंटों एंबुलेंस में घुमाया

Bolta Sach News
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कुशीनगर जच्चा-बच्चा की मौत
बोलता सच : कुशीनगर में ऑपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। लेकिन, डॉक्टर ने दोनों को जिंदा बताकर गोरखपुर रेफर कर दिया। दोनों को एंबुलेंस में डालकर खुद डॉक्टर भी परिवार के साथ बैठ गया। गोरखपुर ले जाने के बहाने कुशीनगर में ही 4 घंटे तक घुमाता रहा।

इस बीच घरवालों को शक हुआ, तो उन्होंने पूछा हम गोरखपुर कब पहुंचेंगे? इस पर डॉक्टर खड्‌डा क्षेत्र में एक जगह एंबुलेंस रुकवाकर खुद गाड़ी से उतरकर भागने लगा। यह देख कर महिला के पति ने उसे पकड़ लिया। उसने तुरंत पुलिस को फोन कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला और बच्चे को मृत पाया। पति ने पुलिस से कहा कि अस्पताल में बार-बार सिर्फ पैसे मांग रहे थे। इन लोगों ने मेरी पत्नी और बच्चे को मार डाला। पुलिस ने डॉक्टर सैयद को गिरफ्तार कर लिया। मृतका की पहचान आसमा खातून (25) के रूप में हुई है। घटना खड्डा के बिव्रांत हॉस्पिटल का है।

मृतका की सास ने बताया- मेरा घर नुमानगंज थाना क्षेत्र के रामपुर जंगल गांव में है। शुक्रवार रात 10 बजे मेरी बहू आसमा को प्रसव पीड़ा हुई। हम लोग उसे खड्‌डा में बने बिव्रांत हॉस्पिटल ले आए। डॉक्टर ने क्रिटिकल कंडीशन बताकर कहा कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। हम लोगों ने पैसे जमा किए। रात करीब 11 बजे ऑपरेशन किया गया। शुरुआत में डॉक्टर सैयद ने बताया कि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। थोड़ी ही देर बाद डॉक्टरों ने ब्लड की जरूरत बताकर मेरे बेटे सिकंदर से 4 लाख रुपए की मांग करने लगे। मेरा बेटा बोला कि उसके पास इतना पैसा नहीं है। थोड़ी देर बाद मेरी बहू की हालत बिगड़ने लगी। तब हॉस्पिटल स्टाफ ने कहा कि उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ेगा। फिर हम लोगों ने पूछा बच्चा कैसा है? तो कहने लगे कि वह बिल्कुल स्वस्थ्य है। बस आप बाकी पैसे जमाकर बच्चे को ले जाइए।

4 घंटे तक शव को एंबुलेंस में घुमाते रहे
इस पर हमने डॉक्टर सैयद से बात की। उसने भी कहा कि दोनों सही हैं। लेकिन, मां को गोरखपुर रेफर करना पड़ेगा। इसके बाद एंबुलेंस बुलाई गई। डॉक्टर सैयद भी हम लोगों के साथ चल दिए। जच्चा-बच्चा दोनों को एंबुलेंस में डाला गया। बच्चा न तो हिल रहा था, न ही मेरी बहू कुछ बोल रही थी। रात 2 बजे हम वहां से गोरखपुर के लिए चले। लेकिन, ड्राइवर शहर में ही हमें इधर-उधर घुमाता रहा। जब सुबह के 6 बज गए, तो हमें शक हुआ। मैंने डॉक्टर से कहा कि हम गोरखपुर कब पहुंचेंगे? इस पर डॉक्टर ने ड्राइवर से कहा कि गाड़ी खड़ी करो।

गाड़ी खड़ी करते ही डॉक्टर भागने लगा

गाड़ी रुकते ही डॉक्टर सैयद उतर कर जाने लगे। इस पर मेरे बेटे ने पूछा कि आप क्यों जा रहे हैं? तभी डॉक्टर ने भागने की कोशिश की। मेरे बेटे ने उसे पकड़ लिया। दोनों में कहासुनी होने लगी। इस बीच मेरे बेटे ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस आई, तो उसने देखा कि बहू और बच्चे की मौत हो चुकी है। इतना देखते ही मेरा बेटा बेहोश हो गया। मेरा हंसता-खेलता बिखर गया। डॉक्टर की लापरवाही से उसकी मौत हो गई।

अवैध रूप से चल रहा था अस्पताल, एमओ ने किया सील

पुलिस ने डॉक्टर सैयद से पूछताछ की, तो पता चला कि अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था। परिजनों ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। प्रभारी चिकित्साधिकारी पारसनाथ गुप्ता ने बताया कि यह अस्पताल अवैध रूप से चल रहा था, जिसे सील कर दिया गया है।
एसडीएम मोहम्मद जफर ने बताया कि महिला और नवजात की मौत की सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे। अस्पताल को सील कर दिया गया है। अस्पताल संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
सीएमओ डॉ. एपी भास्कर ने कहा कि खड्डा क्षेत्र में संचालित सभी प्राइवेट अस्पतालों की जांच कराई जाएगी। बिना रजिस्ट्रेशन या नियमों के विरुद्ध चलता पाया गया, तो कार्रवाई की जाएगी।

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