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तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी, विशेष अदालत ने कहा- यह दुर्लभतम अपराध

Bolta Sach News
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Rape of a three-year-old girl and

बोलता सच,पुणे : पुणे की विशेष अदालत ने तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी 65 वर्षीय भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध दुर्लभतम श्रेणी का है और इसकी क्रूरता को देखते हुए मृत्युदंड ही उचित सजा है।

इस मामले में अदालत ने 25 जून को आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सभी आरोप संदेह से परे साबित कर दिए हैं। इसके बाद सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने दोषी को अधिकतम सजा दिलाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के 12 महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया। अदालत ने इन फैसलों का संज्ञान लेते हुए कहा कि नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों में कठोरतम दंड दिया जाना आवश्यक है।

एक मई को हुई थी वारदात

मामला पुणे जिले के नसरापुर गांव का है। एक मई को गर्मी की छुट्टियां बिताने अपनी दादी के घर आई तीन वर्षीय बच्ची को आरोपी नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर पास की गौशाला में ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया, उसकी हत्या कर दी और शव को छिपाने का प्रयास किया।

घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई कराने के निर्देश दिए और विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की गई।

तेजी से पूरी हुई जांच

पुलिस ने महज 15 दिनों में जांच पूरी कर 82 गवाहों के साथ आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया। 28 मई को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए, जिसके बाद अदालत में बंद कमरे में रोजाना सुनवाई हुई। 21 जून को अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

जांच के दौरान गौशाला के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सबसे अहम साक्ष्य बनी, जिसमें आरोपी बच्ची को अपने साथ ले जाता हुआ दिखाई दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।

करीब 60 दिनों के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करते हुए विशेष अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे जघन्य अपराध समाज की संवेदनाओं को झकझोर देते हैं और इनके लिए कठोरतम दंड आवश्यक है।



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