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UP STF-NCB की बड़ी कार्रवाई: 10 करोड़ की मेथामफेटामाइन के साथ नाइजीरियाई नागरिक गिरफ्तार, साइबर ठगी और ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा

Bolta Sach News
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Major action by UP STF-NCB

बोलता सच,लखनऊ : उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने संयुक्त अभियान में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और ड्रग्स तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान दिल्ली के आर.के. पुरम क्षेत्र से नाइजीरिया के नागरिक ओबेस प्रोस्पर को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से 5.085 किलोग्राम मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) बरामद की गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

जांच एजेंसियों ने आरोपी के पास से पांच मोबाइल फोन और दो पासपोर्ट भी बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी साइबर ठगी के साथ-साथ मादक पदार्थों की तस्करी में भी सक्रिय था।

सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाकर करते थे ठगी

एसटीएफ के मुताबिक, यह गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाता था। इन प्रोफाइलों के जरिए भारतीय युवक-युवतियों से दोस्ती की जाती और धीरे-धीरे उन्हें प्रेमजाल में फंसाया जाता था।

विश्वास कायम होने के बाद पीड़ितों को बताया जाता कि विदेश से उनके लिए महंगे उपहार, डॉलर या पाउंड भेजे गए हैं। इसके बाद गिरोह के सदस्य खुद को कस्टम, आयकर या अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर संपर्क करते और दावा करते कि पार्सल एयरपोर्ट पर रोक दिया गया है। उसे छुड़ाने के नाम पर कस्टम ड्यूटी, जीएसटी और अन्य शुल्क बताकर ऑनलाइन पैसे वसूल लिए जाते थे।

लखनऊ के युवक से 68 लाख रुपये की ठगी

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने लखनऊ के डालीगंज निवासी एक युवक को भी इसी तरह ठगी का शिकार बनाया था। आरोपी ने ‘डोरिस विलियम’ नाम से इंग्लैंड की महिला की फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवक से दोस्ती की और बाद में यूनाइटेड किंगडम के आरबीएस बैंक का फर्जी प्रमाणपत्र दिखाकर उससे करीब 68 लाख रुपये ठग लिए। इस मामले में मदेयगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

पहले पकड़े गए आरोपी से मिला सुराग

एसटीएफ ने इस मामले में 15 मई को दिल्ली से गिरोह के एक अन्य सदस्य उचेनवा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान उसने ओबेस प्रोस्पर का नाम बताया। जब एसटीएफ ने उसकी तलाश शुरू की तो पता चला कि वह साइबर अपराधों के अलावा ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क से भी जुड़ा हुआ है। इसके बाद एनसीबी के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

वीजा खत्म होने के बाद भी भारत में रह रहा था

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह वर्ष 2023 में मेडिकल वीजा पर भारत आया था। वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह दिल्ली के नेब सराय स्थित राजू पार्क इलाके में अवैध रूप से रह रहा था। उसने यह भी स्वीकार किया कि उसके कई नाइजीरियाई साथी दिल्ली में रहकर सोशल मीडिया के जरिए साइबर ठगी करने और मादक पदार्थों की सप्लाई का नेटवर्क संचालित कर रहे हैं।

बैंक खाते और डिजिटल उपकरणों की होगी जांच

एनसीबी ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच एजेंसियां उसके बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, मोबाइल फोन, पासपोर्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही हैं। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े अन्य लोग कहां-कहां सक्रिय हैं और देश के किन-किन राज्यों में इस नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था।

जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम खुलासे होने की संभावना है।


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