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NCRB रिपोर्ट में यूपी की कानून व्यवस्था मजबूत, राष्ट्रीय औसत से 28% कम रही अपराध दर

Bolta Sach News
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UP's law in NCRB report
बोलता सच,लखनऊ : उत्तर प्रदेश को लेकर अक्सर अपराध की खबरें सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट राज्य की कानून व्यवस्था की अलग तस्वीर पेश करती है। बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश की अपराध दर राष्ट्रीय औसत से करीब 28.5 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में प्रति लाख आबादी पर औसत संज्ञेय अपराध दर 252.3 रही, जबकि उत्तर प्रदेश में यह दर 180.2 प्रति लाख आबादी दर्ज की गई। यानी राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले औसत अपराधों की तुलना में यूपी में अपराध कम हुए हैं।
हालांकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और यहां कुल अपराधों की संख्या भी ज्यादा दर्ज होती है, लेकिन आबादी के अनुपात में अपराध दर के आधार पर राज्य की स्थिति काफी बेहतर रही। अपराध दर की रैंकिंग में यूपी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में 21वें स्थान पर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में भारतीय दंड विधान (IPC) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कुल 4,30,552 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए। इनमें 2,21,615 मामले आईपीसी के तहत और 2,08,937 मामले बीएनएस के तहत दर्ज हुए।
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी बड़े राज्य की कानून-व्यवस्था को समझने के लिए केवल कुल अपराधों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं होता। प्रति लाख आबादी पर अपराध दर ज्यादा संतुलित और वास्तविक तस्वीर पेश करती है। अधिक आबादी वाले राज्यों में स्वाभाविक रूप से अपराधों की कुल संख्या अधिक होती है।
एनसीआरबी रिपोर्ट में केरल देश का सबसे अधिक अपराध दर वाला राज्य रहा, जहां प्रति लाख आबादी पर 513 मामले दर्ज किए गए। वहीं केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली शीर्ष पर रही, जहां प्रति लाख आबादी पर 1258.5 अपराध दर्ज हुए।
उत्तर प्रदेश की तुलना में कम आबादी वाले कई राज्यों में अपराध दर अधिक पाई गई। तेलंगाना में प्रति लाख आबादी पर 497.7 मामले, हरियाणा में 368.5, ओडिशा में 366.9 और मध्य प्रदेश में 321.6 मामले दर्ज किए गए। महाराष्ट्र, जिसकी आबादी यूपी से लगभग आधी है, वहां भी अपराध दर 300 प्रति लाख आबादी रही।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 में भी उत्तर प्रदेश की अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम थी। उस समय देश की औसत अपराध दर 448.3 प्रति लाख आबादी थी, जबकि यूपी में यह 335.3 दर्ज की गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी, संगठित अपराध पर सख्ती और तेजी से चार्जशीट दाखिल करने जैसी पहल का असर अब आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगा है। वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में चार्जशीट दाखिल करने की दर 76.7 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 75.6 प्रतिशत से अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य पुलिस अपराध मामलों में तेजी से कार्रवाई कर रही है।

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