इसी बीच कवि और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास का एक बयान राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। उन्होंने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि उत्तर प्रदेश का चुनावी मैदान फिलहाल किसी एक दल के पक्ष में एकतरफा नहीं है।
कुमार विश्वास ने कहा, “उत्तर प्रदेश के मैदान को एकतरफा मत समझिए। आज की स्थिति में मुकाबला काफी फंसा हुआ है। हर दल के अपने फायदे और नुकसान हैं।” उन्होंने खासतौर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में चला उनका ‘चेक’ अब भी वैध है और वह विधानसभा चुनाव में और अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोगों को यह भ्रम है कि लोकसभा चुनाव में जो रणनीति सफल रही, वह विधानसभा में काम नहीं करेगी, लेकिन उनका मानना है कि सपा की रणनीति इस बार और भी मजबूत रूप में सामने आ सकती है।
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। इस चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर 43 सीटें जीती थीं, जिनमें से 37 सीटें सपा और 6 सीटें कांग्रेस के खाते में गईं। वहीं भाजपा 36 सीटों पर सिमट गई थी। भाजपा ने उस समय विपक्ष पर आरोप लगाया था कि उन्होंने ‘संविधान बदलने’ जैसे मुद्दों पर भ्रम फैलाकर मतदाताओं को प्रभावित किया।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ते हुए सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन के संकेत मिल रहे हैं। दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल का साथ मिल चुका है, जिससे उसका समीकरण और मजबूत होता दिख रहा है।
यदि 2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो भाजपा गठबंधन ने 255 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि सपा गठबंधन को 111 सीटें मिली थीं। बसपा केवल एक सीट जीत पाई थी और कांग्रेस को दो सीटों से संतोष करना पड़ा था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाला चुनाव काफी दिलचस्प और कड़ा होने वाला है। एक तरफ सत्ता पक्ष अपने विकास कार्यों और संगठन की मजबूती के दम पर मैदान में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष गठबंधन के सहारे अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश में जुटा है।
ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव अभी से ही रोमांचक होता नजर आ रहा है, जहां हर दल अपनी पूरी ताकत झोंकने के लिए तैयार है।