मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागपाल को यह नई भूमिका सौंपते हुए उन्हें मंडल स्तर की बड़ी जिम्मेदारी दी है। इससे पहले वह लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत थीं और अपने सख्त प्रशासनिक रवैये के लिए जानी जाती रही हैं।
दुर्गा शक्ति नागपाल वर्ष 2013 में उस समय सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने नोएडा में अवैध खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। उस दौरान बालू माफिया पर शिकंजा कसने के चलते उनकी काफी सराहना हुई, लेकिन बाद में एक निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार गिराने के मामले में तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई थी और आईएएस एसोसिएशन ने भी इस कार्रवाई का विरोध किया था।
हालांकि, कुछ समय बाद 22 सितंबर 2013 को उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया और उन्हें अक्टूबर में कानपुर देहात में जॉइंट मजिस्ट्रेट के रूप में तैनाती दी गई। इसके बाद उन्होंने अपने करियर में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और एक सख्त एवं ईमानदार अधिकारी के रूप में पहचान बनाई।
दुर्गा शक्ति नागपाल 2010 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। मूल रूप से आगरा से ताल्लुक रखने वाली नागपाल ने Indira Gandhi Delhi Technical University for Women से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उन्होंने पहले प्रयास में भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में चयन पाया, लेकिन इसके बाद उन्होंने दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी और ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल कर आईएएस बनीं।
उनकी प्रारंभिक पोस्टिंग पंजाब कैडर में हुई थी, जहां उन्होंने मोहाली में भूमि घोटाले के खिलाफ कार्रवाई कर अपनी पहचान बनाई। शादी के बाद उन्होंने अपना कैडर उत्तर प्रदेश स्थानांतरित करा लिया। उनके पति अभिषेक सिंह भी 2011 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने बाद में अपने पद से इस्तीफा देकर फिल्म और वेब सीरीज की दुनिया में कदम रखा।
दुर्गा शक्ति नागपाल का जन्म 25 जून 1985 को छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ था। उनके पिता सुभाष नागपाल भारतीय सांख्यिकी सेवा में अधिकारी रहे हैं, जबकि उनके दादा घनश्याम नागपाल पुलिस विभाग में कार्यरत थे। एक प्रशासनिक परिवार से आने के कारण उन्होंने बचपन से ही अनुशासन और सेवा की भावना को अपनाया।
प्रशासनिक कार्यों के अलावा नागपाल सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहती हैं और अक्सर अपने परिवार के साथ तस्वीरें साझा करती हैं। उनकी कार्यशैली और कड़े फैसलों के कारण उन्हें एक प्रभावी और निर्भीक अधिकारी के रूप में देखा जाता है।
देवीपाटन मंडल की कमिश्नर के रूप में उनकी नियुक्ति से यह उम्मीद जताई जा रही है कि वह क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करेंगी तथा कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को गति देंगी।