सूत्रों के अनुसार, इस बार उद्घाटन कार्यक्रम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बजाय पूर्वी उत्तर प्रदेश में आयोजित किया जा सकता है। हरदोई को कार्यक्रम का संभावित स्थल माना जा रहा है, जहां प्रधानमंत्री एक बड़ी जनसभा को भी संबोधित कर सकते हैं। संभावित कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण भी कर लिया है और तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास 18 दिसंबर 2021 को शाहजहांपुर जिले के रोजा में किया था। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार भी पूर्वी उत्तर प्रदेश से ही इसका उद्घाटन कर क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाएगा। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा हिस्सा, करीब 100 किलोमीटर, हरदोई जिले से गुजरता है, जो इस स्थान को उद्घाटन के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।
गंगा एक्सप्रेसवे फिलहाल 6-लेन का बनाया गया है, जिसे भविष्य में 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज की दूरी को तय करने में लगने वाला समय घटकर लगभग 7 घंटे रह जाएगा, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
यह एक्सप्रेसवे राज्य के 12 प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा, जिनमें मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज शामिल हैं।
इस परियोजना के शुरू होने से न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। एक्सप्रेसवे को राज्य के विकास की रीढ़ के रूप में देखा जा रहा है, जो पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।