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लखनऊ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का जाल, जालसाजों ने बुजुर्ग दंपती से 1.29 करोड़ ठगे

Bolta Sach News
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'Digital Arrest' in Lucknow
बोलता सच,लखनऊ : राजधानी लखनऊ में साइबर ठगी का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जालसाजों ने खुद को ATS और CBI का अधिकारी बताकर एक कैंसर पीड़ित बुजुर्ग और उनकी पत्नी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में फंसा लिया और उनसे करीब 1 करोड़ 29 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। इस पूरे मामले में फर्जी वीडियो कॉल, नकली दस्तावेज और लगातार मानसिक दबाव का इस्तेमाल किया गया। साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह घटना गोमतीनगर विस्तार के खरगापुर इलाके की है, जहां रहने वाले दिलीप कुमार पांडेय और उनकी पत्नी आराधना पांडेय इस ठगी का शिकार बने। 27 मार्च की रात उन्हें WhatsApp पर कॉल और मैसेज मिले, जिनमें जालसाजों ने चार कथित आतंकवादियों की तस्वीरें भेजीं और दावा किया कि पूछताछ में आराधना पांडेय का नाम सामने आया है।

इसके बाद ठगों ने दंपती को यह कहकर डराया कि उनके आधार कार्ड और बैंक अकाउंट का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और हवाला ट्रांजेक्शन में किया जा रहा है। इस तरह के गंभीर आरोपों से दंपती को मानसिक रूप से दबाव में लाने की कोशिश की गई।

कुछ ही देर बाद पीड़िता को एक वीडियो कॉल किया गया, जिसमें सामने व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया और खुद को एटीएस अधिकारी बताया। इसके बाद एक अन्य कॉल में खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पूछताछ की गई। ठगों ने दंपती को यह विश्वास दिलाया कि उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया गया है और जांच पूरी होने तक वे किसी से संपर्क नहीं कर सकते।

डर और भ्रम की इस स्थिति में 4 अप्रैल से 10 अप्रैल के बीच जालसाजों ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.29 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए। उन्हें यह भी भरोसा दिलाया गया कि यह रकम Reserve Bank of India की जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और बाद में वापस कर दी जाएगी।

ठगों ने दंपती को और अधिक भ्रमित करने के लिए Supreme Court of India का लोगो लगा एक फर्जी दस्तावेज भी भेजा, जिससे उन्हें मामला बेहद गंभीर और कानूनी प्रतीत हुआ। इसी झांसे में आकर दंपती लगातार जालसाजों के निर्देशों का पालन करते रहे।

पीड़ित दिलीप कुमार पांडेय ने बताया कि वे कैंसर से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है। इस ठगी में उनकी जीवनभर की जमा पूंजी खत्म हो गई, जिससे अब उनके इलाज पर भी संकट खड़ा हो गया है। यह घटना उनके परिवार के लिए गहरा आर्थिक और मानसिक आघात बनकर सामने आई है।

मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और बैंक ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल्स तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति यदि खुद को सरकारी अधिकारी बताकर डराने या पैसे मांगने की कोशिश करे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना पुलिस को दें।

यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं, ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।


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