भावनाओं से खेलकर ठगी
अधिकारियों के मुताबिक, कई समूह युद्ध पीड़ितों की मदद के नाम पर लोगों से पैसे मांग रहे हैं। ये लोग दावा करते हैं कि यह रकम ईरान के प्रभावित लोगों तक पहुंचाई जाएगी, जबकि असल में यह एक संगठित ठगी है। ऐसी गतिविधियां पहले इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष के दौरान भी देखी गई थीं, जब फर्जी संस्थाएं सामने आईं और भारी फंड इकट्ठा कर गायब हो गईं।
ठग लोगों को भावुक करने के लिए युद्ध से जुड़ी डरावनी तस्वीरें दिखाते हैं, जिनमें से कई डिजिटल रूप से छेड़छाड़ की गई होती हैं। इन तस्वीरों को देखकर लोग न सिर्फ नकद बल्कि सोना और अन्य कीमती सामान तक दान कर देते हैं।
जम्मू-कश्मीर में ज्यादा असर
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस ठगी का सबसे ज्यादा प्रभाव जम्मू और कश्मीर में देखा गया है। यहां कुछ लोग घर-घर जाकर चंदा मांग रहे हैं और झूठी कहानियों के जरिए लोगों को गुमराह कर रहे हैं। अधिकारियों को संदेह है कि यह वही नेटवर्क है जो पहले अलगाववादी गतिविधियों के लिए फंड जुटाता था। अब तक इस घोटाले के जरिए करोड़ों रुपये वसूले जा चुके हैं, जिनमें से करीब 16 करोड़ रुपये सिर्फ जम्मू-कश्मीर से जुटाए गए हैं।
ऑफलाइन तरीके से चल रहा नेटवर्क
एजेंसियों के अनुसार, ये ठग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बचते हुए ऑफलाइन तरीके से काम कर रहे हैं ताकि उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो। वे फर्जी रसीदें देकर लोगों को विश्वास में लेते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस फंड का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में किया जा सकता है। इस पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय रूप से जांच में जुटी हुई हैं।
लोगों से अपील
अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान संस्था या व्यक्ति को दान देने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें और भावनाओं में आकर कोई आर्थिक मदद न करें।