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बांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी, राजद और प्रशांत किशोर के बीच दिलचस्प मुकाबला, बदला चुनावी समीकरण

Bolta Sach News
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Bankipur by-election BJP

बोलता सच,पटना : बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव इस बार सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल हो गया है। अब तक यह सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है, जहां पूर्व विधायक नितिन नवीन लगातार पांच बार जीत दर्ज कर चुके हैं। लेकिन इस बार राजनीतिक परिस्थितियां बदली हुई हैं। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला पहले की तुलना में अधिक रोचक और बहुकोणीय होता नजर आ रहा है।

चुनावी मुकाबले को लेकर अलग-अलग दावे

बांकीपुर में आम मतदाताओं के बीच यह धारणा बन रही है कि मुख्य मुकाबला भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बीच है। हालांकि भाजपा इस दावे से सहमत नहीं है। पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि उनका सीधा मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता से है और प्रशांत किशोर चुनावी दौड़ में निर्णायक स्थिति में नहीं हैं।

दूसरी ओर राजद भी भाजपा को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी बता रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जन सुराज का अभी कोई मजबूत राजनीतिक आधार नहीं है और चुनाव में वास्तविक लड़ाई भाजपा और राजद के बीच ही है।

क्या त्रिकोणीय मुकाबले की रणनीति पर भाजपा?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले का स्वरूप देने की कोशिश कर रही है। ऐसा होने पर विपक्षी मतों का विभाजन संभव है, जिसका लाभ भाजपा को मिल सकता है। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि भाजपा राजद को दूसरे स्थान का प्रमुख दावेदार बताकर चुनावी रणनीति साध रही है।

एनडीए के विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करना चाहते हैं प्रशांत किशोर

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर लंबे समय से खुद को बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। बांकीपुर उपचुनाव में उनकी सक्रियता को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रशांत किशोर इस चुनाव के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि मौजूदा सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है। उनका फोकस उन मतदाताओं पर है जो राज्य की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था से असंतुष्ट हैं।

सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश

विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर एक ओर नीतीश कुमार से नाराज मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर राजद के पारंपरिक एम-वाई (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक में भी सेंध लगाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि उन्हें इस वर्ग का उल्लेखनीय समर्थन मिलता है तो चुनावी मुकाबले का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

इसके अलावा माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर शहरी मध्यम वर्ग और सवर्ण मतदाताओं के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। हाल के कुछ चर्चित स्थानीय मुद्दों पर उनकी सक्रियता को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजद ने किया प्रशांत किशोर पर हमला

राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने प्रशांत किशोर की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे वास्तविक जननेता नहीं बल्कि एक राजनीतिक सलाहकार रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर के पास न तो बांकीपुर के विकास की कोई ठोस योजना है और न ही क्षेत्र की समस्याओं की गहरी समझ।

एजाज अहमद ने दावा किया कि राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्ष राजनीति का प्रतिनिधित्व कर रही हैं तथा जनता का समर्थन उन्हें मिल रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और आम नागरिकों के मुद्दों को लेकर राजद चुनाव मैदान में उतरा है और मतदाता इसका जवाब मतदान के जरिए देंगे।

उपचुनाव पर पूरे प्रदेश की नजर

बांकीपुर उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा अपने गढ़ को बचाने की चुनौती का सामना कर रही है, राजद अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, जबकि प्रशांत किशोर इस चुनाव के जरिए खुद को राज्य की राजनीति में एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।

ऐसे में यह उपचुनाव केवल उम्मीदवारों की जीत-हार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके नतीजे बिहार की आगामी राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों पर भी असर डाल सकते हैं। फिलहाल सभी दल अपने-अपने दावों के साथ चुनावी मैदान में सक्रिय हैं और अंतिम फैसला मतदाता करेंगे।


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