बोलता सच,नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के हालिया इंटरव्यू के बाद कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों ने करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और इस मुद्दे पर सरकार जवाबदेही से बच नहीं सकती।
खरगे ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे लाखों-करोड़ों छात्रों के सपने प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि नीट पेपर लीक प्रकरण से जुड़े तनाव और अनिश्चितता के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली, जिससे अनेक परिवारों को गहरा आघात पहुंचा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक इंटरव्यू का हवाला देते हुए कहा कि छात्रों की आवाज उठाने वालों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आलोचना और सवालों को स्वीकार करने के बजाय विरोध करने वालों को निशाना बनाती है। खरगे ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्व टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार के खिलाफ सवाल उठाने वालों को अक्सर अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया जाता है। खरगे ने कहा कि छात्र अपने भविष्य और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
दरअसल, एक दिन पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा जिन लोगों को परीक्षा प्रक्रिया की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उनमें से कुछ ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर परीक्षा की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, उन्हीं में से कुछ ने व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया।
धर्मेंद्र प्रधान ने स्वीकार किया कि इस पूरे घटनाक्रम ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों और विशेषज्ञों पर प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित रखने का दायित्व था, उनमें से कुछ लोगों ने विश्वास तोड़ा। उन्होंने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि पेपर लीक प्रकरण से उत्पन्न परिस्थितियों और छात्रों की परेशानियों को लेकर वे स्वयं भी नैतिक रूप से जिम्मेदारी महसूस करते हैं। उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार इस दिशा में आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा रही है।
नीट पेपर लीक विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच छात्रों और अभिभावकों की मुख्य मांग परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।
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