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ब्राह्मण वोटों को लेकर सपा पर बरसे ब्रजेश पाठक, बोले- चुनाव तक याद, बाद में भूल जाएगी पार्टी

Bolta Sach News
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SP regarding Brahmin votes
बोलता सच,लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी द्वारा ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिशों के बीच उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनकी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी को केवल चुनाव के समय ब्राह्मण समाज की याद आती है, जबकि सत्ता मिलने के बाद वह सिर्फ परिवारवाद की राजनीति करती है।

ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया मंच X पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि सपा ब्राह्मण समाज का सम्मान नहीं, बल्कि केवल उनके वोट चाहती है। उन्होंने लिखा कि पार्टी ब्राह्मणों से वोट लेकर सत्ता हासिल करना चाहती है, लेकिन शासन में परिवारवाद को ही प्राथमिकता देती है।

उन्होंने कहा कि यदि जनेश्वर मिश्र की जयंती वास्तव में मनानी थी तो उनके व्यक्तित्व, समाजवादी विचारों और राजनीतिक योगदान पर चर्चा होनी चाहिए थी। लेकिन कार्यक्रम में उनके विचारों की बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत टिप्पणियां अधिक देखने को मिलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान ब्राह्मण समाज का भी अपमान किया गया।

डिप्टी सीएम ने कहा कि जनेश्वर मिश्र और डॉ. राममनोहर लोहिया जिस समाजवादी विचारधारा के प्रतिनिधि थे, आज की समाजवादी पार्टी उससे पूरी तरह भटक चुकी है। उन्होंने कहा कि लोहिया और जनेश्वर मिश्र लोकतांत्रिक बहस और संसदीय परंपराओं में विश्वास रखते थे, जबकि वर्तमान सपा सदनों की कार्यवाही बाधित करने और हंगामा करने की राजनीति करती है।

ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि संसद और उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने जनहित के मुद्दों पर रचनात्मक बहस करने के बजाय केवल व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास किया। उनके अनुसार, संविधान की बातें करने वाले विपक्षी दल स्वयं संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान नहीं करते।

उन्होंने सपा नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें समय-समय पर डॉ. राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र के विचारों का अध्ययन करना चाहिए। उनका दावा था कि यदि आज जनेश्वर मिश्र जीवित होते तो अपनी जयंती के नाम पर हो रही राजनीति से दुखी होते।

ब्रजेश पाठक ने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी के लिए ब्राह्मण समाज केवल एक वोट बैंक है। चुनाव के दौरान पार्टी ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश करती है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही उन्हें भूल जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की राजनीति अब समाजवाद, सामाजिक न्याय और समरसता से दूर होकर केवल परिवारवाद और सत्ता केंद्रित हो गई है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में समाजवादी पार्टी ने अयोध्या सीट से पवन पांडेय को उम्मीदवार घोषित करने के साथ ही जनेश्वर मिश्र की जयंती पर बड़े कार्यक्रम आयोजित किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं भाजपा इसे चुनावी राजनीति करार देते हुए लगातार निशाना साध रही है।



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