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प्राइवेट अस्पतालों में कमरे का किराया अब 3-स्टार होटल से ज्यादा नहीं? संसदीय समिति ने दिया बड़ा सुझाव

Bolta Sach News
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rooms in private hospitals

बोलता सच,नई दिल्ली : देश में निजी अस्पतालों में इलाज के बढ़ते खर्च के बीच संसदीय स्थायी समिति ने अस्पताल के कमरों के किराए को लेकर अहम सुझाव दिया है। समिति की सिफारिश स्वीकार होने पर बड़े शहरों के निजी अस्पताल मरीजों से कमरे का बेसिक किराया अपने आसपास के 3-स्टार होटलों के औसत किराए से अधिक नहीं ले सकेंगे।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में निजी अस्पतालों में इलाज को अधिक किफायती और पारदर्शी बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। समिति ने अस्पतालों के बिलों का अध्ययन करने के बाद पाया कि खासकर बड़े शहरों में कुछ निजी अस्पताल कमरों के लिए काफी अधिक शुल्क वसूल रहे हैं।

कमरे के किराए पर लगेगी सीमा

समिति का सुझाव है कि बड़े शहरों में सभी निजी अस्पतालों के लिए कमरे के बेसिक किराए की अधिकतम सीमा तय की जानी चाहिए। इसके लिए अस्पताल के आसपास स्थित 3-स्टार होटलों के औसत कमरे के किराए को आधार बनाया जा सकता है।

हालांकि, यह सीमा केवल कमरे के मूल किराए पर लागू करने का सुझाव दिया गया है। अस्पताल रेजिडेंट डॉक्टर की फीस, नर्सिंग चार्ज, डिस्पोजेबल सामान, भोजन और लॉन्ड्री जैसी सेवाओं का शुल्क अलग से ले सकेंगे।

अलग-अलग अस्पतालों के किराए में भारी अंतर

संसदीय समिति ने माना कि अस्पतालों में कमरों का किराया एक समान नहीं हो सकता। एक ही इलाके में स्थित अस्पतालों के बीच भी किराए में अंतर हो सकता है। इसका कारण अस्पताल की सुविधाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवाओं का स्तर और संचालन लागत में अंतर होना है।

इसके बावजूद समिति का कहना है कि मरीजों पर पड़ने वाले इलाज के आर्थिक बोझ को कम करने के लिए कमरे के किराए को उचित स्तर पर लाना जरूरी है। समिति का मानना है कि शुल्क की स्पष्ट व्यवस्था होने से मरीजों को इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च का बेहतर अंदाजा मिल सकेगा।

अभी सरकार की मंजूरी जरूरी

समिति की यह सिफारिश अभी अस्पतालों के लिए बाध्यकारी नियम नहीं है। रिपोर्ट 7 अगस्त को राज्यसभा में पेश की गई और लोकसभा में भी रखी गई। सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार की मंजूरी और आवश्यक नियामकीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

यदि सरकार इस सुझाव को मंजूरी देती है, तो बड़े शहरों के निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए कमरे के किराए पर एक सीमा तय हो सकती है। इससे अस्पतालों के बिल में होने वाले बड़े अंतर को कम करने और निजी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।



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