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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की टिप्पणी, बोलीं- अपशब्द हमारी शिक्षा और संस्कृति का हिस्सा नहीं

Bolta Sach News
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Governor on Jantar Mantar protest
बोलता सच,लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करना सभी का अधिकार है, लेकिन भाषा और व्यवहार हमेशा मर्यादित होना चाहिए।
शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जंतर-मंतर का आंदोलन समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग देश की शिक्षा, संस्कृति और सभ्य संवाद की परंपरा के अनुरूप नहीं है।
राज्यपाल ने कहा, “आज सभी को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सार्वजनिक जीवन में शालीनता और संस्कारों को भुला दिया जाए। लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अभद्र भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती।”
उन्होंने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण होना चाहिए और युवाओं को सकारात्मक सोच तथा जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
इस बीच, जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े एक वीडियो को लेकर नोएडा में एक युवती के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के आधार पर 29 जुलाई को जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि वीडियो में प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था।
बाद में संबंधित युवती ने एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उसने कहा कि प्रदर्शन के दौरान वह वहां मौजूद लोगों के प्रभाव में आ गई थी और उसी दौरान उसने अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया। उसने अपने व्यवहार पर खेद भी जताया।
वहीं, इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्रों के प्रति नरम रुख अपनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया गया, लेकिन समाज को बदले की भावना से नहीं, बल्कि युवाओं को सही दिशा दिखाने की भावना से आगे बढ़ना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि युवाओं से गलती हो सकती है और समाज का दायित्व उन्हें सुधारने का है, न कि केवल दंडित करने का। उन्होंने लोगों से छात्रों को माफ करने और उन्हें सकारात्मक मार्गदर्शन देने की अपील की थी।

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