Breaking News

जैसलमेर में गोडावण संरक्षण को बड़ी सफलता, पहली बार तीन चूजों को प्राकृतिक जीवन के लिए विशेष सुरंग में छोड़ा गया

Bolta Sach News
|
Great Indian Bustard Conservation in Jaisalmer

बोलता सच,जैसलमेर : राजस्थान के जैसलमेर जिले के रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण केंद्र में विलुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता मिली है। पहली बार निगरानी में तैयार किए गए तीन गोडावण चूजों को प्राकृतिक जीवन के अनुकूल बनाने के लिए विशेष रूप से विकसित सुरंग में छोड़ा गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल गोडावण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

अधिकारियों के अनुसार, करीब 9.25 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस अत्याधुनिक सुविधा का उद्देश्य निगरानी में प्रजनन से जन्मे चूजों को प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप तैयार करना और उनके साथ मानवीय संपर्क को न्यूनतम रखते हुए उन्हें जंगल में स्वतंत्र जीवन जीने के लिए सक्षम बनाना है।

प्राकृतिक माहौल में विकसित होंगी जीवन रक्षक प्रवृत्तियां

वन अधिकारियों ने बताया कि यह पहल केवल नियंत्रित प्रजनन तक सीमित नहीं है, बल्कि गोडावण को उसके प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है। एक अधिकारी ने बताया कि पहली बार तीन चूजों को विशेष सुरंग में रखा गया है, जहां वे बिना किसी प्रत्यक्ष मानवीय संपर्क के प्राकृतिक परिवेश में रहना सीखेंगे और धीरे-धीरे जंगल के जीवन के लिए तैयार होंगे।

चार महीने तक रहेगी विशेष निगरानी

अधिकारियों ने बताया कि ये तीनों चूजे लगभग चार महीने तक इस विशेष सुरंग में रहेंगे। इस दौरान उनकी गतिविधियों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार निगरानी रखी जाएगी। उन्हें बाहर से भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन किसी भी कर्मचारी का उनसे प्रत्यक्ष संपर्क नहीं होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य चूजों में भोजन खोजने, खुले क्षेत्र में विचरण करने और मरुस्थलीय पारिस्थितिकी के अनुरूप स्वयं को ढालने जैसी प्राकृतिक जीवन रक्षक क्षमताओं का विकास करना है।

डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़े जाएंगे चूजे

उप वन संरक्षक अशोक सिंह ने कहा कि अब मुख्य लक्ष्य इन पक्षियों को पूरी तरह जंगल के जीवन के लिए तैयार करना है, ताकि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सके। योजना के अनुसार, इन चूजों को भविष्य में डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़ा जाएगा।

गोडावण संरक्षण के लिए मील का पत्थर

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयोग गोडावण संरक्षण अभियान के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। पिछले कई वर्षों में इस दुर्लभ पक्षी की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में निगरानी में तैयार अधिक गोडावणों को बड़े पैमाने पर प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सकेगा।

अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में गोडावण की घटती आबादी को बढ़ाने के प्रयासों को नई गति मिलेगी। उल्लेखनीय है कि गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) राजस्थान का राज्य पक्षी है और इसे दुनिया के सबसे संकटग्रस्त पक्षियों में गिना जाता है।


इसे भी पढ़े : फतेहपुर में बोले सीएम योगी- विकास ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत, माफिया के लिए सिर्फ जेल या जहन्नुम का रास्ता


Discover more from Bolta Sach News - बोलता सच न्यूज़ - सच लिखने का साहस

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Reply

error: