इंटरव्यू में खुला फर्जी दस्तावेजों का राज
मामला 7 अगस्त का है, जब युवक US Embassy में वीजा इंटरव्यू के लिए पहुंचा। दस्तावेजों को लेकर पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी की B.Com (Computers) की डिग्री समेत कई दस्तावेज फर्जी थे।
युवक ने डिग्री के अलावा मार्कशीट, ट्रांसक्रिप्ट, सेमेस्टर ग्रेड रिपोर्ट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट भी जमा किए थे। पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि उसने संबंधित यूनिवर्सिटी में कभी पढ़ाई तक नहीं की थी। उसके मुताबिक, ये दस्तावेज विजयवाड़ा के वीजा एजेंट नितिन ने उपलब्ध कराए थे।
नौकरी का अनुभव भी कथित तौर पर फर्जी
वीजा आवेदन में युवक ने एक कंपनी का अपरेजल लेटर भी लगाया था। इसमें उसकी मासिक सैलरी 35 हजार रुपये बताई गई थी। अनुभव प्रमाणपत्र में दावा किया गया कि उसने 27 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक कंपनी में काम किया। हालांकि, पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि उसने वहां केवल करीब ढाई महीने काम किया था। युवक ने यह भी दावा किया कि कंपनी उसके अंकल की है और नौकरी से जुड़े दस्तावेज भी वहीं से उपलब्ध कराए गए थे।
बैंक खाते में दिखाए 95 लाख रुपये
वीजा आवेदन में करीब 1.2 करोड़ रुपये की संपत्ति वाला नेट-वर्थ सर्टिफिकेट लगाया गया था। इसके अलावा बैंक दस्तावेजों में करीब 45 लाख और 50 लाख रुपये का बैलेंस दिखाया गया था। शिकायत के मुताबिक, युवक ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि बैंक स्टेटमेंट भी फर्जी थे और इन्हें एजेंट नितिन के कहने पर तैयार कराया गया था।
उधार लेकर बढ़ाया गया बैंक बैलेंस
आरोप है कि परिवार ने बैंक खातों में बड़ी रकम दिखाने के लिए पैसे उधार लिए थे। हालांकि, इस रकम को नेट-वर्थ सर्टिफिकेट में कर्ज के तौर पर नहीं दर्शाया गया। US Embassy की शिकायत में आरोप लगाया गया कि युवक ने एजेंट और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर शिक्षा, नौकरी, बैंक और संपत्ति से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार किए और इनका इस्तेमाल अमेरिकी सरकार को गलत जानकारी देकर वीजा हासिल करने के लिए किया।
8 अगस्त को दर्ज हुई FIR
US Embassy की शिकायत पर 8 अगस्त को चाणक्यपुरी पुलिस ने FIR दर्ज की। दूतावास के अधिकारी ने युवक को पुलिस के हवाले कर दिया। अब पुलिस फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों और वीजा एजेंट समेत इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।