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गोरखपुर : चिड़ियाघर में फर्जी टिकट घोटाले का खुलासा, राजस्व गबन में वन विभाग कर्मी समेत पांच पर कार्रवाई

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Gorakhpur Fake tickets found at zoo

बोलता सच,गोरखपुर। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में फर्जी टिकटों के जरिए राजस्व गबन का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में वन विभाग के एक कर्मचारी और चार निजी कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर चारों निजी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार, प्राणि उद्यान में लंबे समय से टिकट काउंटर के कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर फर्जी टिकट जारी किए जा रहे थे। मामले का खुलासा फरवरी में पार्किंग टिकटों के हिसाब में 450 रुपये की गड़बड़ी सामने आने के बाद हुआ।

प्राणि उद्यान के निदेशक सूरज कुमार के निर्देश पर उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति में रेंजर वन गौरव वर्मा और रेंजर द्वितीय श्याम बिहारी सिंह को भी शामिल किया गया। जांच टीम ने 14 अप्रैल से 13 मई तक के सीसीटीवी फुटेज और टिकट बिक्री के रिकॉर्ड का मिलान किया, जिसमें कई दिनों के आंकड़ों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 19 अप्रैल को सीसीटीवी फुटेज में दर्ज दर्शकों की संख्या और रिकॉर्ड में दर्ज टिकटों की संख्या के बीच लगभग 440 लोगों का अंतर मिला। इससे एक ही दिन में करीब 22 हजार रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया। अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है।

जांच रिपोर्ट में वन दरोगा एवं बीट प्रभारी तृतीय शैलेश कुमार गुप्ता पर टिकट काउंटर संख्या तीन के कंप्यूटर सिस्टम से अनधिकृत रूप से छेड़छाड़ कर फर्जी टिकट निकालने का आरोप लगाया गया है। जांच के दौरान निजी कर्मचारी अमन यादव, हरिशंकर चौहान, खुशबू सिंह और अंशुमान सिंह के नाम भी सामने आए, जिसके बाद उन्हें सेवा से हटा दिया गया।

450 रुपये की गड़बड़ी से खुला पूरा मामला

बताया जा रहा है कि पार्किंग टिकटों में मात्र 450 रुपये के अंतर ने पूरे घोटाले का पर्दाफाश किया। पार्किंग पर्चियों के मिलान के दौरान कुछ क्रमांकित पर्चियां गायब मिलीं, जिससे हिसाब-किताब में अंतर सामने आया। इसके बाद विस्तृत जांच कराई गई तो टिकट बिक्री में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर हो गई।

सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले टिकट काउंटर की जिम्मेदारी शैलेश कुमार गुप्ता से लेकर नीरज सिंह को सौंप दी गई थी। इसके बावजूद शैलेश काउंटर पर आते-जाते रहे और इसी दौरान कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर फर्जी टिकट जारी किए जाते थे। आरोप है कि फर्जी टिकटों से प्राप्त धनराशि को आपस में बांट लिया जाता था।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।


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