बोलता सच,नई दिल्ली : यमुना नदी में प्रदूषण और बुराड़ी क्षेत्र में मछलियों की मौत के मामले पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में चल रही सुनवाई के बीच हरियाणा सरकार ने अपना विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया है। सरकार ने कहा है कि ड्रेन-6 और डायवर्जन ड्रेन-8 से आने वाले बिना उपचारित गंदे पानी को पूरी तरह रोकने का कार्य 30 जून 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा।
सीवेज और औद्योगिक कचरे पर नियंत्रण की योजना
हरियाणा सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानों पर सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को रोकने के लिए ट्रैपिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसे आगे चलकर चरणबद्ध तरीके से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जोड़ा जाएगा। ड्रेन-6 से जुड़े क्षेत्रों में वर्तमान में 7 एसटीपी संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 92.5 एमएलडी है। इसके अलावा 5 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) भी कार्यरत हैं, जिनकी क्षमता 48 एमएलडी है। सरकार का दावा है कि अधिकांश इकाइयां निर्धारित मानकों के अनुरूप काम कर रही हैं, हालांकि कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त क्षमता और नए संयंत्रों की आवश्यकता बनी हुई है।
बुराड़ी में मछलियों की मौत से जुड़ा मामला
यह रिपोर्ट जुलाई 2024 में सामने आए उस मामले के संदर्भ में दाखिल की गई है, जब बुराड़ी इलाके में यमुना किनारे बड़ी संख्या में मछलियों की मौत और तेज दुर्गंध की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद एनजीटी ने हरियाणा सरकार से पूछा था कि स्टॉर्म वॉटर ड्रेनों में औद्योगिक कचरा कैसे पहुंच रहा है और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
नजफगढ़ झील का बढ़ता प्रदूषण
इसी बीच एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नजफगढ़ झील में गिरने वाले तीन प्रमुख नाले—L1, L2 और L3—प्रदूषण के बड़े स्रोत बने हुए हैं। ये नाले झील के पानी से अधिक प्रदूषित पाए गए हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की मई रिपोर्ट के अनुसार, नजफगढ़ झील में प्रदूषण स्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। अपस्ट्रीम में BOD स्तर अप्रैल में 32 mg/l था, जो मई में बढ़कर 38 mg/l हो गया, जबकि डाउनस्ट्रीम में यह 75 mg/l से बढ़कर 85 mg/l तक पहुंच गया।
DPCC नियमित रूप से झील के पांच स्थानों पर पानी की गुणवत्ता की जांच कर रही है, जिसमें अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम और नालों के मिलने वाले बिंदु शामिल हैं।
समग्र स्थिति
नजफगढ़ झील, जिसका बड़ा हिस्सा हरियाणा के गुरुग्राम क्षेत्र में आता है और एक हिस्सा दिल्ली में, लंबे समय से प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। दिल्ली सरकार ने अपना पुनरुद्धार प्लान पहले ही एनजीटी को सौंप दिया है, जबकि अब हरियाणा सरकार से भी इसी दिशा में ठोस कार्ययोजना की उम्मीद की जा रही है।
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