पंकज चौधरी ने कहा कि अगर अखिलेश यादव में हिम्मत है तो वे अपने 2012 से 2017 तक के कार्यकाल का “भर्ती और परिवारवाद ऑडिट” जारी करें। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान नौकरियों में पारदर्शिता नहीं थी और भर्ती प्रक्रिया “पर्ची और खर्ची” मॉडल पर चलती थी। भाजपा नेता ने दावा किया कि उस समय उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग “जाति विशेष सेवा आयोग” बन गया था और इस पर सुप्रीम कोर्ट तक ने सवाल उठाए थे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अखिलेश यादव के 90 दिनों में जातीय जनगणना कराने के दावे पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब सपा सत्ता में थी और केंद्र में यूपीए सरकार को समर्थन दे रही थी, तब पिछड़ों और दलितों की गिनती की चिंता क्यों नहीं हुई। अब सत्ता से बाहर होने के बाद जातीय जनगणना का मुद्दा उठाकर युवाओं को गुमराह किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार ने “डबल इंजन” मॉडल के तहत 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं और सभी भर्तियों में आरक्षण नियमों का पालन किया गया है। भाजपा का दावा है कि अब नौकरियां सिफारिश और रिश्वत के बजाय पारदर्शी प्रक्रिया से दी जा रही हैं।
69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए पंकज चौधरी ने कहा कि यह मामला पिछली नीतिगत गलतियों का परिणाम है और फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सभी वर्गों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सपा के “पीडीए” यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण पर हमला बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सपा का पीडीए वास्तव में “परिवार, दल और एक विशेष वोटबैंक” तक सीमित है। वहीं भाजपा के लिए पीडीए का अर्थ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े गरीब और वंचित लोग हैं, जिन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है।
पंकज चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब जातिवाद, तुष्टिकरण और दंगों की राजनीति से आगे बढ़ चुका है। उनके मुताबिक प्रदेश अब विकास, सुशासन और पारदर्शिता की राजनीति को प्राथमिकता दे रहा है।