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मन की बात में बोले पीएम मोदी: गंगा डॉल्फिन बचाना सिर्फ एक जीव नहीं, पूरी जैव विविधता की रक्षा है

Bolta Sach News
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PM Modi said in Mann Ki Baat
बोलता सच,नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने खेल, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, पारंपरिक पेय पदार्थों और जल संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में गंगा डॉल्फिन के सफल रेस्क्यू अभियान का उल्लेख करते हुए इसे प्रकृति संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के दिनों में एक वीडियो ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें बचाव दल के सदस्य बेहद धैर्य और सावधानी के साथ एक गंगा डॉल्फिन को सुरक्षित बचाने का प्रयास करते नजर आए। उन्होंने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने में करीब 13 घंटे का समय लगा और अंततः डॉल्फिन को सुरक्षित बचा लिया गया।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक जीव को बचाने की घटना नहीं है, बल्कि प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक भी है। प्रधानमंत्री ने बचाव अभियान में भारत की पहली गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस की अहम भूमिका का भी उल्लेख किया।
पीएम मोदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में एक गंगा डॉल्फिन नहर में फंस गई थी। सूचना मिलने पर ‘नमामि गंगे’ अभियान के तहत तैयार की गई विशेष रेस्क्यू एम्बुलेंस को मौके पर भेजा गया। बचाव दल ने डॉल्फिन को सुरक्षित बाहर निकालकर उसकी चिकित्सकीय जांच की और आवश्यक उपचार के बाद उसे Rapti River में छोड़ दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विशेष एम्बुलेंस एक चलते-फिरते अस्पताल की तरह कार्य करती है। इसमें डॉल्फिन को सुरक्षित रखने की व्यवस्था, ऑक्सीजन सुविधा, विशेष स्ट्रेचर और आधुनिक बचाव उपकरण उपलब्ध हैं। इसके माध्यम से घायल, भटकी हुई या नहरों में फंसी डॉल्फिनों को तत्काल सहायता प्रदान की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि जब हम गंगा डॉल्फिन की रक्षा करते हैं, तब हम केवल एक प्रजाति को नहीं बचाते, बल्कि Ganga River की जैव विविधता और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने का कार्य करते हैं। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने बचपन की उन यादों को भी साझा किया, जो नदियों, तालाबों और कुओं से जुड़ी होती हैं। उन्होंने कहा कि पानी से जुड़ी ये स्मृतियां जीवनभर लोगों के मन में बनी रहती हैं और प्रकृति के साथ हमारे रिश्ते को मजबूत बनाती हैं। साथ ही उन्होंने नागरिकों से जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहने का आह्वान किया।

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