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डीईआरसी में नियमित नियुक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली सरकार से मांगी समयसीमा

Bolta Sach News
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Regular appointments in DERC
बोलता सच,नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) में चेयरपर्सन और सदस्यों की नियमित नियुक्तियों को लेकर दिल्ली सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि चयन समिति के गठन की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी, इसकी स्पष्ट समयसीमा अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई 29 मई को निर्धारित की है।

यह मामला गैर-सरकारी संगठन ‘एनर्जी वॉचडॉग’ द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पिछले लंबे समय से डीईआरसी में नियमित नियुक्तियां नहीं होने के कारण आयोग का कामकाज प्रभावित हो रहा है। आयोग में कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई और निर्णय लंबित पड़े हैं, जिससे बिजली उपभोक्ताओं और संबंधित कंपनियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा कि वह सक्षम प्राधिकारी से स्पष्ट निर्देश लेकर बताए कि चयन समिति का गठन कब तक किया जाएगा और नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया किस समयसीमा में पूरी होगी।

दिल्ली सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि चयन समिति के गठन से संबंधित प्रस्ताव चार मई को आगे बढ़ाया जा चुका है। हालांकि अदालत ने इस जवाब पर संतोष व्यक्त नहीं किया और सरकार से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट देने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियुक्तियों की दिशा में ठोस प्रगति भी दिखाई देनी चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रणव सचदेवा ने अदालत को बताया कि पिछले लगभग एक वर्ष से डीईआरसी में सुनवाई और फैसलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि आयोग में नियमित अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति न होने के कारण बिजली क्षेत्र से जुड़े कई विवादों का समाधान नहीं हो पा रहा है। इससे उपभोक्ताओं के हितों पर भी असर पड़ रहा है।

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया था। अदालत ने सरकार से पूछा था कि आयोग में नियमित नियुक्तियां क्यों नहीं की जा रही हैं और इस प्रक्रिया में देरी का क्या कारण है। एनर्जी वॉचडॉग की याचिका में अदालत से मांग की गई है कि सरकार को जल्द से जल्द नियमित नियुक्तियां करने का निर्देश दिया जाए।

याचिका में पिछले वर्ष अगस्त में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक आदेश का भी उल्लेख किया गया। उस समय अदालत ने एक अन्य याचिका की सुनवाई करते हुए यह दर्ज किया था कि दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने भरोसा दिलाया था कि डीईआरसी में नियमित नियुक्तियों की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर ली जाएगी। इसके बावजूद अब तक नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार को जल्द कार्रवाई करने का संकेत दिया है। अदालत का मानना है कि डीईआरसी जैसे महत्वपूर्ण नियामक संस्थान में रिक्त पद लंबे समय तक खाली नहीं रहने चाहिए, क्योंकि इसका सीधा प्रभाव बिजली व्यवस्था और उपभोक्ता हितों पर पड़ता है। अब इस मामले में सभी की नजरें 29 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।


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