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देवरिया में गोरखपुर रोड ओवरब्रिज के नीचे अवैध मजार निर्माण का मामला गरमाया, एसडीएम ने प्रबंधक को भेजा अंतिम नोटिस

Bolta Sach News
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Gorakhpur Road in Deoria
बोलता सच देवरिया ( सज्जाद पप्पू ) : गोरखपुर रोड स्थित ओवरब्रिज के नीचे मेहड़ा पुरवा में अब्दुल गनी शाह की मजार के कथित अवैध निर्माण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन ने अब सख्ती बरतते हुए मजार प्रबंधक राशिद खान को अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे आगामी 4 सितंबर को सुबह 10 बजे तक अपना पक्ष प्रस्तुत करें, अन्यथा एकपक्षीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस पूरे प्रकरण की सुनवाई वाद संख्या 1137/2019 के तहत आरबीओ (Religious Buildings and Obstructions) एक्ट की धारा 10 में चल रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, राशिद खान को पहले भी इस संदर्भ में नोटिस जारी किया गया था, लेकिन न तो वह निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित हुए और न ही कोई अनुपस्थिति पत्र प्रस्तुत किया गया। बार-बार की अनुपस्थिति को प्रशासन ने गंभीर लापरवाही माना है।

विधायक की शिकायत के बाद मामला आया तेजी में

मामले में तेजी उस वक्त आई जब सदर विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने बिना किसी अधिकृत नक्शे के मजार निर्माण की शिकायत उपजिलाधिकारी सदर को पत्र लिखकर की। विधायक द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और जांच में पाया गया कि निर्माण कार्य नक्शा स्वीकृति के बिना किया जा रहा था। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह मामला काफी समय से विचाराधीन है, लेकिन संबंधित पक्ष की लगातार गैर-हाजिरी के चलते निर्णय में देरी हो रही है। अब प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि नियत समय तक जवाब नहीं दिया गया, तो न केवल निर्माण पर रोक लगाई जाएगी, बल्कि अनुमोदन के बिना निर्माण करने पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
मजार की वैधता पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर इस मजार की वैधता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि यह स्थान पहले खाली पड़ा था और बीते कुछ वर्षों में धीरे-धीरे वहां निर्माण कार्य किया गया। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावना से जोड़ते हुए संवेदनशील मामला बताया है, जबकि प्रशासन इसे भूमि उपयोग और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे के संदर्भ में देख रहा है। एसडीएम सदर ने कहा है कि प्रशासन धार्मिक आस्था का सम्मान करता है, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। नियमानुसार अनुमति के बिना कोई भी धार्मिक संरचना सार्वजनिक भूमि पर नहीं बनाई जा सकती।

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