Breaking News

गोरखपुर में दसवीं के कम नंबर पर डांट से आहत छात्रा ने दी जान, पिता गिरफ्तार

Bolta Sach News
|
Low marks in class 10th in Gorakhpur
बोलता सच,गोरखपुर : गोरखपुर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पढ़ाई के दबाव और पिता की डांट से आहत होकर 16 वर्षीय छात्रा ने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और सनसनी का माहौल है। पुलिस ने मृतका की मां की शिकायत पर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

यह मामला सहजनवा थाना क्षेत्र के तिलौरा गांव का है। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी दुर्गेशधर द्विवेदी की बेटी आराध्या द्विवेदी ने CBSE की दसवीं की परीक्षा दी थी। 15 अप्रैल को घोषित परिणाम में उसे 78 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। हालांकि, उसके पिता इस परिणाम से संतुष्ट नहीं थे।

परिजनों के मुताबिक, रिजल्ट आने के बाद पिता ने बेटी को जमकर डांटा-फटकारा और कथित रूप से प्रताड़ित किया। इस बात से आहत होकर आराध्या ने जहरीला पदार्थ खा लिया। कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद पिता उसे अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि घटना के समय घर पर आराध्या की मां और भाई मौजूद नहीं थे। जब वे लौटे और बेटी को घर में नहीं पाया तो उन्होंने पिता से पूछताछ की। पिता ने अनभिज्ञता जताई, जिससे शक और गहरा गया। बाद में जब कार की डिग्गी खोली गई तो उसमें आराध्या का शव मिला। यह दृश्य देखकर मां बेसुध होकर गिर पड़ी।

मामले की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। इसी बीच आरोपी पिता वहां से फरार हो गया। बाद में मृतका की मां ने थाने में तहरीर देकर पति पर बेटी को आत्महत्या के लिए उकसाने, मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और अपमानित करने का आरोप लगाया।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी की तलाश तेज कर दी। गुरुवार को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया।

इस संबंध में सहजनवा थाना प्रभारी महेश चौबे ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची थी। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि तहरीर के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

यह घटना एक बार फिर बच्चों पर पढ़ाई का अत्यधिक दबाव बनाने के खतरनाक परिणामों की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए और उन्हें सहयोग व प्रोत्साहन का वातावरण देना चाहिए, न कि केवल अंकों के आधार पर मूल्यांकन करना चाहिए।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Reply